Wednesday, April 30, 2008

लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं

अपनी पत्नी मातिल्दे के साथ पाब्लो नेरूदा

पाब्लो नेरूदा का पहला काव्य संग्रह था 'वेइन्ते पोएमास दे आमोर ई ऊना कान्सीयोन देसएस्पेरादा' (बीस प्रेम कविताएं और हताशा का एक गीत)। १९२४ में इस पतली सी किताब के प्रकाशित होने के बाद पाब्लो विश्वविख्यात नाम हो गये। फ़कत बीस साल की उम्र थी तब उनकी।

यह इन कविताओं में पूरी ईमानदारी से बयान किया हुआ युवा नेरूदा का अगाध प्रेम और उस से उपजी हताशा और कुंठा सब मिलकर इस संग्रह को कालजयी बना चुके हैं। जब मैं १९९४-९५ के समय वेनेज़ुएला में था, इस संग्रह की यह ख़ास कविता ने मुझे कई और कारणों से आकर्षित किया था। मौज मस्ती पसन्द करने वाले लातीन अमरीकी स्त्रियों के बीच यह कविता ख़ासी लोकप्रिय थी और पार्टी वगैरह में ज़रा सा इसरार करने पर वे इसे सुनाने को भी तैयार हो जाती थीं; यहां यह बात अलहदा है कि गीत का अन्त आते आते वे बाकायदा रोना शुरू कर देती थीं और यह रोना हर दफ़ा होता था. नेरूदा की कविताएं गाई जाती हैं, उन्हें पता नहीं कितने लोगों ने अपनी आवाज़ दी है और विशेषतः इस वाली कविता के तो संभवतः पांच सौ से ज़्यादा अलग-अलग रेकॉर्ड्स इत्यादि उपलब्ध हैं. होसे हुआन तोर्रेस की आवाज़ में आप भी सुनिये इस अद्भुत कविता को. हो सकता है स्पानी भाषा समझ में न आये, पर उसकी मिठास को और उस के दर्द को अनुभव कीजिए. आगे कविता का अनुवाद भी दिया गया है:

boomp3.com

Puedo escribir los versos más tristes esta noche

Escribir, por ejemplo: "La noche está estrellada,
y tiritan, azules, los astros, a lo lejos."

El viento de la noche gira en el cielo y canta

Puedo escribir los versos más tristes esta noche
Yo la quise, y a veces ella también me quiso.

En las noches como ésta la tuve entre mis brazos.
La besé tantas veces bajo el cielo infinito.

Ella me quiso, a veces yo también la quería.
Cómo no haber amado sus grandes ojos fijos.

Puedo escribir los versos más tristes esta noche.
Pensar que no la tengo. Sentir que la he perdido

Oír la noche inmensa, más inmensa sin ella.
Y el verso cae al alma como al pasto el rocío.

Qué importa que mi amor no pudiera guardarla.
La noche está estrellada y ella no está conmigo.

Eso es todo. A lo lejos alguien canta. A lo lejos.
Mi alma no se contenta con haberla perdido.

Como para acercarla mi mirada la busca.
Mi corazón la busca, y ella no está conmigo.

La misma noche que hace blanquear los mismos árboles.
Nosotros, los de entonces, ya no somos los mismos.

Ya no la quiero, es cierto, pero cuánto la quise.
Mi voz buscaba el viento para tocar su oído.

De otro. Será de otro. Como antes de mis besos.
Su voz, su cuerpo claro. Sus ojos infinitos.

Ya no la quiero, es cierto, pero tal vez la quiero.
Es tan corto el amor, y es tan largo el olvido.

Porque en noches como ésta la tuve entre mis brazos,
Mi alma no se contenta con haberla perdido.

Aunque éste sea el último dolor que ella me causa,
y éstos sean los últimos versos que yo le escribo

अब प्रस्तुत है कविता का अनुवाद:

लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं

लिख सकता हूं उदाहरण के लिये: "तारों भरी है रात
और तारे हैं नीले, कांपते हुए सुदूर"

रात की हवा चक्कर काटती आसमान में गाती है.

लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं
मैंने प्रेम किया उसे और कभी कभी उसने भी प्रेम किया मुझे

ऐसी ही रातों में मैं थामे रहा उसे अपनी बांहों में
अनन्त आकाश के नीचे मैंने उसे बार-बार चूमा.

उसने प्रेम किया मुझे और कभी-कभी मैंने भी प्रेम किया उसे.
कोई कैसे प्रेम नहीं कर सकता था उसकी महान और ठहरी हुई आंखों को.

लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं.
सोचना कि मेरे पास नहीं है वह. महसूस करना कि उसे खो चुका मैं.

सुनना इस विराट रात को जो और भी विकट उसके बग़ैर.
और कविता गिरती है आत्मा पर जैसे चरागाह पर ओस.

अब क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मेरा प्यार संभाल नहीं पाया उसे.
तारों भरी है रात और वह नहीं है मेरे पास.

इतना ही है. दूर कोई गा रहा है. दूर.
मेरी आत्मा संतुष्ट नहीं है कि वह खो चुकी उसे.

मेरी निगाह उसे खिजने की कोशिश करती है जैसे इस से वह नज़दीक आ जाएगी.
मेरा दिल खोजता है उसे और वह नहीं है मेरे पास.

वही रात धवल बनाती उन्हीं पेड़ों को
हम उस समय के, अब वही नहीं रहे.

मैं उसे और प्यार नहीं करता, यह तय है पर कितना प्यार उसे मैंने किया
मेरी आवाज़ ने हवा को खोजने की कोशीस की ताकि उसे सुनता हुआ छू सकूं

किसी और की. वह किसी और की हो जाएगी. जैसी वह थी
मेरे चुम्बनों से पहले. उसकी आवाज़ उसकी चमकदार देह उसकी अनन्त आंखें

मैं उसे प्यार नहीं करता यह तय है पर शायद मैं उसे प्यार करता हूं
कितना संक्षिप्त होता है प्रेम, भुला पाना कितना दीर्घ.

क्योंकि ऐसी ही रातों में थामा किया उसे मैं अपनी बांहों में
मेरी आत्मा संतुष्ट नहीं है कि वह खो चुकी उसे.

हालांकि यह आख़िरी दर्द है जो सहता हूं मैं उसके लिये
और ये आख़्रिरी उसके लिये कविताएं जो मैं लिखता हूं.


(संवाद प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 'बीस प्रेम कविताएं और हताशा का एक गीत' से)

नेरूदा की एक और कविता कबाड़ख़ाने में
यहां सुनी और पढ़ी जा सकती है. कबाड़ख़ाने पर ही नेरूदा से सम्बन्धित एक और लेख यहां देखें.

4 comments:

siddheshwar singh said...

बहुत उम्दा प्रस्तुति.
भाई मेरे विश्व कविता की प्रस्तुति में तो आपने गजब ढा रक्खा है. इस बीच तो मैं बुरी तरह फ़ंसा हुआ हूं.हमारे बाकी भाई-बिरदर कुच नया लगा क्यों नहीं रहे हैं .
टैट करो साब !

अमिताभ मीत said...

बहुत उम्दा प्रस्तुति है अशोक भाई. आभार.

Geet Chaturvedi said...

इधर आपने सचमुच बहुत अच्‍छी चीजें पोस्ट की हैं. नेरूदा, हिकमत आदि. ये कवि तो अपने भी बड़े अज़ीज़ हैं. पिछले दिनों मैं नामदेव ढसाल की एक मराठी कविता (हिंदी में उसका शीर्षक होगा 'पाब्‍लो नेरूदा के मरने से हमने क्‍या सीखा') पढ़ रहा था. फुरसत मिलते ही उसे हिंदी में कर पढ़ेंगे हम. नेरूदा सबसे ज़्यादा पढ़े जाने कवि ही नहीं, सबसे मशहूर काव्‍य विषय भी हैं यानी दुनिया में जिस कवि पर सबसे ज़्यादा कविताएं लिखी गईं, वह नेरूदा ही हैं. अति सुंदर. मातील्‍दा की तस्‍वीर भी अच्‍छी है. एक तस्‍वीर में महाकवि मातील्‍दा के माथे पर अपनी ठुड्डी टिका खड़े हैं. उस तस्‍वीर पर एक कविता लिखी थी मैंने.
फिर से बधाई.

वर्षा said...

कितना संक्षिप्त होता है प्रेम
भुला पाना कितना दीर्घ
..इस सुंदर कविता को पढ़वाने के लिए शुक्रिया