Sunday, August 17, 2008

एंडी गार्सीया की आवाज़ में नेरूदा की 'सैडेस्‍ट पोएम'



पाब्‍लो नेरूदा की 'सैडेस्‍ट पोएम' के बारे में पहले भी कई बार लिखा जा चुका है.  जो कविता के क़रीब रहते हैं, उन्‍हें पता है कि यह कितनी लोकप्रिय रही है. कबाड़ख़ाना में कुछ समय पहले अशोक पांडे ने इस कविता का हिंदी अनुवाद और होसे हुआन तोर्रेस की आवाज़ में इसे सुनाते हुए इसके बारे में लिखा भी था. उसे यहां पढ़ें-सुनें.

कहने की बात नहीं है कि कई लोगों की तरह मुझे भी यह कविता बहुत पसंद है और कई-कई बार मैं इस तक लौटकर जाता हूं. जब कभी रात में हवा का भंवर गाता हुआ-सा ऊपर उठता है या यह अहसास होता है कि एक बार फिर मैंने किसी को खो दिया है. जब यह लगता है कि प्रेम का क्षण कितना छोटा होता है और उसे भुला पाना कितनी लंबी प्रक्रिया. शायद एक अनंत प्रक्रिया. जब आत्‍मा यह मानने से इंकार कर देती है कि कोई हमेशा के लिए उसके घर से निकल चुका है और आंख चुराने से बड़ी कोई चोरी नहीं लगती. पूरे चांद की रात जब किसी उदास अकेले पेड़ पर बेआवाज़ उतरती है और अपने उतरने के सबूत में एक सफ़ेदी उस पर छोड़ जाती है. इस वक़्त मशीन गोद में ले मैं छत पर बैठा हूं और नीचे काली शाल ओढ़े जाती एक आकृति बार-बार नींद से लंबी इस सड़क पर, दूर, उभर-उभर आती है. मेरी दाहिनी हथेली पर एक बूंद गिरती है. बारिश की. शब्‍दों के आसमान से ऐसे ही गिरती होगी कविता. बेआवाज़. फिर झमाझम बरसती हैं स्‍मृतियां, जिनसे बचने का दुनियावी उपाय खोजना होता है.

किताब में जिस पेज पर यह कविता है, ऐसा लगता है, कि वह अपने पहले की पेज की कविताओं से कुछ पूछ रही है और अपने बाद की कविताओं को कुछ बता रही है. जैसे नेरूदा अपनी एक छोटी कविता में कहते हैं- 'क्‍या कहता होगा गुरुवार आने वाले शुक्रवार से'.

फिल्‍म है 'इल पोस्तिनो'  (अंग्रज़ी में 'द पोस्‍टमैन'. साल 1994). पाब्‍लो नेरूदा की जि़ंदगी के एक टुकड़े पर बनी है. इसमें नेरूदा की कई कविताओं को पढ़ा गया है. 'सैडेस्‍ट पोएम' का पाठ एंडी गार्सीया ने किया था. हमारे यहां, आम लोगों ने तो नहीं ही, फिर भी ढंग का पढ़ने-लिखने, ढंग का सुनने-देखने वालों ने ज़रूर देखी होगी और इन कविताओं का आस्‍वाद भी लिया होगा. फिल्‍म के स्‍कोर्स की एक सीडी भी जारी हुई थी, जिसमें नेरूदा की कविताओं का पाठ मैडोना, जूलिया रॉबर्ट्स, स्टिंग, सैमुएल एल जैकसन, मिरांडा रिचर्डसन, विंसेंट पेरेस आदि ने किया था. दिल्‍ली-मुंबई जैसे शहरों में मिल भी सकती है.

कविता का अंग्रेज़ी पाठ यहां दिया गया है और उसके नीचे हिंदी में.




Tonight I can write the saddest lines.

Write, for example,'The night is shattered
and the blue stars shiver in the distance.'

The night wind revolves in the sky and sings.

Tonight I can write the saddest lines.
I loved her, and sometimes she loved me too.

Through nights like this one I held her in my arms
I kissed her again and again under the endless sky.

She loved me sometimes, and I loved her too.
How could one not have loved her great still eyes.

Tonight I can write the saddest lines.
To think that I do not have her. To feel that I have lost her.

To hear the immense night, still more immense without her.
And the verse falls to the soul like dew to the pasture.

What does it matter that my love could not keep her.
The night is shattered and she is not with me.

This is all. In the distance someone is singing. In the distance.
My soul is not satisfied that it has lost her.

My sight searches for her as though to go to her.
My heart looks for her, and she is not with me.

The same night whitening the same trees.
We, of that time, are no longer the same.

I no longer love her, that's certain, but how I loved her.
My voice tried to find the wind to touch her hearing.

Another's. She will be another's. Like my kisses before.
Her voide. Her bright body. Her inifinite eyes.

I no longer love her, that's certain, but maybe I love her.
Love is so short, forgetting is so long.

Because through nights like this one I held her in my arms
my sould is not satisfied that it has lost her.

Though this be the last pain that she makes me suffer
and these the last verses that I write for her.

Pablo Neruda

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लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं

लिख सकता हूं उदाहरण के लिये: "तारों भरी है रात
और तारे हैं नीले, कांपते हुए सुदूर"

रात की हवा चक्कर काटती आसमान में गाती है.

लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं
मैंने प्रेम किया उसे और कभी कभी उसने भी प्रेम किया मुझे

ऐसी ही रातों में मैं थामे रहा उसे अपनी बांहों में
अनन्त आकाश के नीचे मैंने उसे बार-बार चूमा.

उसने प्रेम किया मुझे और कभी-कभी मैंने भी प्रेम किया उसे.
कोई कैसे प्रेम नहीं कर सकता था उसकी महान और ठहरी हुई आंखों को.

लिख सकता हूं आज की रात बेहद दर्दभरी कविताएं.
सोचना कि मेरे पास नहीं है वह. महसूस करना कि उसे खो चुका मैं.

सुनना इस विराट रात को जो और भी विकट उसके बग़ैर.
और कविता गिरती है आत्मा पर जैसे चारागाह पर ओस.

अब क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मेरा प्यार संभाल नहीं पाया उसे.
तारों भरी है रात और वह नहीं है मेरे पास.

इतना ही है. दूर कोई गा रहा है. दूर.
मेरी आत्मा संतुष्ट नहीं है कि वह खो चुकी उसे.

मेरी निगाह उसे खोजने की कोशिश करती है जैसे इस से वह नज़दीक आ जाएगी.
मेरा दिल खोजता है उसे और वह नहीं है मेरे पास.

वही रात धवल बनाती उन्हीं पेड़ों को
हम उस समय के, अब वही नहीं रहे.

मैं उसे और प्यार नहीं करता, यह तय है पर कितना प्यार उसे मैंने किया
मेरी आवाज़ ने हवा को खोजने की कोशिश की ताकि उसे सुनता हुआ छू सकूं

किसी और की. वह किसी और की हो जाएगी. जैसी वह थी
मेरे चुम्बनों से पहले. उसकी आवाज़ उसकी चमकदार देह उसकी अनन्त आंखें

मैं उसे प्यार नहीं करता यह तय है पर शायद मैं उसे प्यार करता हूं
कितना संक्षिप्त होता है प्रेम, भुला पाना कितना दीर्घ.

क्योंकि ऐसी ही रातों में थामा किया उसे मैं अपनी बांहों में
मेरी आत्मा संतुष्ट नहीं है कि वह खो चुकी उसे.

हालांकि यह आख़िरी दर्द है जो सहता हूं मैं उसके लिये
और ये आख़्रिरी उसके लिये कविताएं जो मैं लिखता हूं.

(अनुवाद: अशोक पांडे, संवाद प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 'बीस प्रेम कविताएं और हताशा का एक गीत' से)

7 comments:

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah..
adbhut...

Pratyaksha said...

हर बार वैसी ही टीस ..चाहे जितनी बार सुनी हो

सुशील कुमार छौक्कर said...

हमें भी कबाडखाने का रसिक बना लिया। अब विदेशी कविता गाने सुनना अच्छा लगने लगा हैं।

anurag vats said...

film maine kuch din pahle dekha...usi men beshumar kavitayen bhi suni...unka prabhaw amit hai...

मीत said...

An all time faviurite. Just encounter it and it penetrates through you. The pain, and longing ... they always do. The intensity never seems to die down.

शिरीष कुमार मौर्य said...

बहुत अच्छी पोस्ट गीत !

दीपा पाठक said...

शानदार, मर्मस्पर्शी कविता और उसके भावों को और भी गहराई से समझाती हुई सी सुंदर भूमिका। धन्यवाद गीत।