Wednesday, April 27, 2011

जैसे चॉकलेट के लिए पानी - ९

(पिछली किस्त से जारी)


फ़ौन्डेन्ट आइसिंग के लिए:

८०० ग्राम चीनी का बुरादा
६० बूंदें नींबू का रस और पर्याप्त पानी

चीनी और पानी को एक बरतन में घोल कर गरम करें, लगातार हिलाएं जब तक कि वह उबलने लगे. इसे छानकर दूसरे बरतन में डालें और दुबारा गरम करें, नींबू का रस डालें और पकाएं जब तक कि चाशनी तैयार न हो जाए. साथ ही बरतन के किनारों को भीगे कपड़े द्र पोंछते रहें ताकि चीनी सूख न जाए. अब इस मिश्रण को किसी नम बरतन में डालें थोड़ा पानी छिड़कें और ज़रा ठण्डा होने दें.

जब यह ठण्डा हो जाए, इसे लकड़ी के चम्मच से फेंटें जब तक यह क्रीम जैसा न दिखाई देने लगे.

केक को आइस करने के लिए फ़ौन्डेन्ट में एक चम्मच दूध मिलाकर मुलायम होन्व तक गरम करें, एक बूंद खाने का लाल रंग मिलाएं और केक के केवल ऊपरी भाग की इस फ़ैन्डेन्ट से आइसिंग करें.

"बच्ची, मैंने इसे पहले ही मिला दिया है, देखती नहीं यह कितना गुलाबी हो चुका है?"

"नहीं तो ..."

"अब जाकर सो जाओ मेरी बच्ची. मैरिन्गे आइसिंग मैं ख़ुद तैयार कर लूंगी. केवल बरतन जानता है उबलते हुए सूप को कैसा लगता है.ल्र्किन मैं जानती हूंतुम्हें कैसा महसूस हो रहा है. और रोना बन्द करो. तुम मैरिन्गे को ज़्यादा ही गीला कर दे रही हो. फ़िर यह जम भी नहीं पाएगा - अब चलो - जाओ."

नाचा ने तीता पर चुम्बनों की बौछार करते हुए उसे रसोई से बाहर कर दिया. इन नए आंसुओंको तीता नहीं समझ पाई, लेकिन वे निकल चुके थे और उन्होंने मैरिन्गे का वान्छित गाढ़ापन बदल दिया था. अब केक की मैरिन्गे आइसिंग ल्करना दूने परिश्रम का काम होगा. अब नाचा को यह करना था कि जल्दी से जल्दी इस काम मो पूरा कर के सो सके. मैरिन्गे आइसिंग के लिए दस अण्डों की सफ़ेदी और पांच सौ ग्राम चीनी फेंटनी होती है जब तक कि गाढ़ी चाशनी न तैयार हो जाए.

मैरिन्गे को फेंट चुकने के बाद नाचा को ख़्याल आया कि अपनी उंगलियॊम में लगी हुई आइसिंग को चख कर देखे कि कहीं तीता के आंसुओं ने उसका स्वाद तो बदल नहीं दिया है. चखने पर उसने पाया कि स्वाद में कोई बदलाव नहीं आया है.लेकिन बिना किसी मनःस्थिति के नाचा का मन इच्छाओं से भर उठा. एक के बाद उसकी स्मृति में वे तमाम शादियां आती गईं जिनके लिए उसने खाना तैयार किया था. दे ला गार्ज़ा परिवार की हर शादी में वह इस भ्रम के साथ खाना बनाती गई कि अगली शादी उसकी होगी. कम से कम इसका भ्रम तो रहता ही था. पिचासी की उमर में रोने का कोई अर्थ नहीं था - खासतौर पर उस शादी के लिए जो हुई ही नहीं, हालांकि उसका एक मंगेतर था. हां था एक मंगेतर उसका. लेकिन मामा एलेना की मामा ने उसका बोरिया-बिस्तर बांधकर भगा दिया था. तब से नाचा बस दूसरों की शादियों की खुशियां मनाया करती थी - बरसों से, बिना शिकायत किए. तो अब क्या शिकायत थी उसे? य्श कोई मज़ाक हो सकता था पर उसकी समझ में कुछ नहीं आया. अपनी सामर्थ्यानुसार उसने केक को मैरिन्गे आइसिंग से सजायाऔर अपने कमरे में चली आई - उसके दिल में एक तीखा दर्द था. वह पूरी रात रोती रही और अगली सुबह इस लायक नहीं थी कि शादी के किसी भी काम में मदद दे पाती.

नाचा की जगह लेने को तीता कुछ भी कर सकती थी पर तीता को न केवल विवाह की रस्म के समय उपस्थित रहना थाअ बल्कि यह भी निश्चित करना था कि उसका चेहरा उसकी भावनाओं को छिपाए रहे. उसे लगा वह ऐसा कर पाएगी जब तक कि उसकी आंखें पेद्रो सी आंखों से न टकराएं. ऐसा होने पर शान्त और स्थिरचित्त होने का उसका दावा बिखर कर रह जाता.

उसे मालूम था कि अपनी बहन रोसौरा के स्थान पर स्वयं वह लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई थी. मेहमान न केवल एक सामाजिक रस्म निबटा रहे थे, वे तीता की यातना को भी देखना चाहते थे.लेकिन वह उन्हें सन्तुष्ट नहीं होने देगी. बिल्कुल नहीं. चर्च में चलते हुए उसने तमाम लोगों की फुसफुसाहटें सुनीं जो उसकी पीठ पर घाव करती रहीं.

(जारी)

1 comment:

शालिनी कौशिक said...

मन की वेदना के बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.aage bhi intzar rahega.