(पिछली किस्त से जारी)
पाकशास्त्रियों की उस श्रॄंखला की तीता अन्तिम कड़ी थी जिसमें पाककला के रहस्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी, लम्बे समय से बताए जाया करते थे और तीता को पाककला की इस शानदार परम्परा में एक श्रेष्ठ स्थान प्राप्त था. रैन्च की मान्यता प्राप्त पाकशास्त्री का दर्ज़ा तीता को दिए जाने का फ़ैसला काफ़ी लोकप्रिय रहा. नाचा को खो चुकने के दुःख के बावजूद तीता इस बार पर प्रसन्न हुई.
नाचा की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु ने तीता को भीतर तक दुखी किया. अब वह बिल्कुल अकेली हो गई थी. उसे लगा था जैसे उसकी वास्तविक मां मर गई हो.उसके दुःक्ग भुलाने की मदद करने के लिए पेद्रो ने रसोई-सम्राज्ञी बनने के एक साल पूरा होने की ख़ुशी में तीता को ग़ुलाबों का एक दस्ता देने का चिचार किया थी. लेकिन रोसौरा - जो जल्द ही पहले बच्चे की मां बनने वाली थी - इस बात पर राज़ी नईं हुई और जब उसने पेद्रो को ग़ुलाबों का दस्ता लेकर भीतर घुसते देखा, जो उसके बजाए तीता के लिए था, वह फूट-फूट कर रोने लगी और कमरे से बाहर निकल गई.
मामा एलेना की एक निगाह पड़ते ही तीता ग़ुलाबों को फेंकने चली गई. लेकिन देर हो चुकॊ थीऔर पेद्रो कोअपनी बेवकूफ़ी का अहसास हुआ. मामा एलेना की एक और निगाह ने पेद्रो को जताया कि वह अब भी बहुत कुछ कर सकता है. वह ऐसी निगाह थी कि पेद्रो कमरे से बाहर रोसौरा को देखने चला गया. तीता ने ग़ुलाबों को अपनी छाती से इद कदर भींच रखा था को ग़ुलाबों का गुलाबी रंग, उसके रसोई में पहुंचने से पहले लाल हो चुका था. उसके हाथों और छातियों से रिसते खून ने उन्हें रंग दिया था. उसे ग़ुलाबों के बारे में जल्दी कुछ सोचना था. वे इतने सुन्दर थे कि उन्हें ऐसे ही कूड़े में नहीं फेंका जा सकता था - एक तो यह कि उसे पहली बार किसी ने फूल दिए थे और दूसरे यह कि वे फूल पेद्रो ने दिए थे अचानक उसे लगा कि नाचा उसे कोई बेहद प्राचीन व्यंजन बनाने की विधि बतला रही है जिसमें गुलाब की पंखुड़ियों का प्रयोग किया जाता है. तीता इस व्यंजन को तकरीबन भूल चुकी थी क्योंकि इसके लिए तीतरों की ज़रूरत होती थी जिन्हें रैन्च में नहीं पाला जाता था.
रैन्च में बटेरें उपलब्ध थीं सो तीता ने व्यंजन में कुछ संशोधन करने का फ़ैसला किया ताकि ग़ुलाबों का इस्तेमाल किया जा सके. दोबारा सोचे बग़ैर तीता बाहर गई और उसने एक-एक कर छः बटेरें पकड़ीं और रसॊई में जाकर उन्हें मारने की तैयारी शुरू की. उन्हें मारना थोड़ा मुश्किल होता क्योंकि उन्हें काफ़ी अर्से से पाला पोसा गया था.
एक गहरी साम्स लेकर तीता ने पहली बटेर पकड़कर उसकी गरदन मरोड़ी जैसे उसने नाचा को करते हुए देखा था लेकिन बटेर को मारने के लिए उसने पर्याप्त ताकत नहीं लगाई और बेचारी चिड़िया एक तरफ़ को गोरी हुई अपनी गरदन के साथ रसोई में दयनीय तरीके से इध्र-उधर भागने लगी. तीता को अहसास हुआ कि किसी को मारते वक्त आप कमज़ोर नहीं हो सकते. इसके लिए मज़बूत होना होगा वरना आपको अधिक दुःख होगा. उसे लगा कि इस वक्त वह अपनी मां की ताकत का इस्तेमाल कर सकती है. मामा एलेन बिल्कुल निर्दयी थीं - वे एक बार में मार दिया करती थीं. लेकिन हर बार नहीं. तीता को उन्होंने अपवाद बनाए रखा था. बचपन से ही वे उसे थोड़ा-थोड़ा करके मार रही थीं और उनका काम अभी समाप्त नहीं हुआ था.पेद्रो और रोसौरा की शादी ने तीता के दिल और दिमाग को तोड़ डाला था.. वह उसी घायल बटेर जैसी हो गई थी. बटेर को और दर्द न होने देने के लिए तीता ने निर्णायक कदमों से उसे उठाकर उसकी गरदन ठीक से मरोड़ दी.उसके बाद बाकी बटेरों को मारना असान रहा. तीता ने ऐसा सोच लिया कि हर बटेर के गले में एक अधउबला अण्डा अटका हुआ है और उन्हें मारकर वह उन्हें उनकी पीड़ा से मुक्त कर रही है. जब वह बच्ची थी अधउबला अण्डा खाने के बजाए वह मरना पसन्द करती. मामा एलेना उसे ज़बरदस्ती अधउबले अण्डे खिलाया करती थीं. उसेलगता जैसे उसके गले में गांठ पड़ गई हो. वह और कुछ नहीं खा पाती थी पर तब मामा एलेना उसकी पीठ पर एक चमत्कारिक धौल मारा करतीं जिस से अण्डा बिना कष्ट के फिसलता नीचे चला जाता. अब वह ज़्यादा शान्त थी और बाक़ी का काम करने में उसे कोई मुश्किल नहीं हुई.
वह सारा काम ऐसी कुशलता से कर रही थी मानो नाचा उसके शरीर में प्रविष्ट हो गई हो, बटेरों को छील-साफ़ कर रही हो.
बटेरों को साफ़ करने और उनकी ड्रेसिंग कर चुकने के बाद उनके पैरों को एक साथ लाकर बांध दिया जाता है ताहि मक्खन में भुन चुकने और नमक -कालीमिर्च छिड़क दिए जाने के बाद परोसे जाते समय वे अच्छी दिखें.
बटेर को साफ़ करते वक्त सूखे रहने देना चाहिएक्योंकि उबले पानी में डाल देने से उनका स्वाद खराब हो जाता है. ऐसे रहस्य अभ्यास से ही साधे जा सकते हैं. एक बार अपनी उंगलियां जला लेने के बाद रोसौरा कुछ भी नहीं जानती थी और उसे ऐसे रहस्य पता नहीं थे. चाहे पेद्रो को प्रभावित करने को या तीता से मुकाबला करने को पता नहीं एक दिन रोसौरा ने खाना पकाने का फ़ैसला किया. जब तीता ने उसे कुछ सलाहें देना शुरू कीं तो वह चिढ़ गई और उसने तीता से रसोई छोड़कर जाने को कहा.
चावल कच्चे बने थे, मांस सूख गया था और स्वीट डिश जल गई थी. लेकिन मेज़ पर किसी की हिम्मत नहीं हुई कि खाने के बारे में एक भी शब्द बोल दे.खास तौर पर मामा एलेना के ऐसा कहने पर कि -
"रोसौरा ने पहली बार खाना बनाया है और उतना बुरा नहीं बना है. क्या कहते हो पेद्रो?"
भरसक अपनी पत्नी को अपमानित न करने की कोशिश करते हुए पेद्रो बोला -
"नही नहीं पहली बार के लिए बुरा नहीं है"
और जैसा कि होना ही था उस दोपहर सारे परिवार का पेट गड़बड़ाया रहा.
वह एक त्रासदी थी लेकिन इस बार जो हुआ रैन्च पर पहले कभी नहीं हुआ था. तीता के खून और पेद्रो के ग़ुलाबों का मिश्रण बेहद विस्फोटक साबित हुआ.
खाने की मेज़ पर बैठने और बटेरों के परोसे जाने तक हर कोई तनाव में था. जैसे पेद्रो अपनी पत्नी को पहले ही पर्याप्त ईर्ष्या से न भर चुका हो, पहला कौर खाकर आनन्द में अपनी आंखें बन्द कर बोला -
"यह खाना तो देवताओं के मतलब का है."
मामा एलेना जानती थीं बटेर बहुत शानदार बनी हैं पर पेद्रो की टिप्पणी उन्हें ज़्यादा नहीं भाई. उन्होंने कहा -
"नमक बहुत ज़्यादा है."
रोसौरा ने कहा कि उसे कुछ अजीब सा लग रहा है और उसने कुल तीन ही टुकड़े खाए, लेकिन गरत्रूदिस को कुछ विचित्र-सा हो रहा था.
(जारी)
Showing posts with label लॉरा एस्कीवेल. Show all posts
Showing posts with label लॉरा एस्कीवेल. Show all posts
Wednesday, May 4, 2011
Tuesday, May 3, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी -१२
(पिछली किस्त से जारी)
अध्याय ३
मार्च
ग़ुलाब की पंखुड़ियों के सॉस में पकी बटेर
सामग्री:
१२ ग़ुलाब, लाल हों तो बेहतर
१२ अखरोट
२ छोटे चम्मच मक्खन
२ छोटे चम्मच स्टार्च
२ बूंदें ग़ुलाब का अर्क
२ छोटे चम्मच सौंफ़
२ छोते चम्मच शहद
२ फांक लहसुन
६ बटेर
१ पिताया
बनाने की विधि:
ग़ुलाब की पंखुड़ियों को सावधानी से अलग करें. कोशिश करें कि कांटे उंगलियों में न चुभें क्योंकि इस से दर्द तो होता ही है. पंखुड़ियों में ख़ूमन लग जाने से न केवल व्यंजन का स्वाद बदल सकता है, ख़तरनाक रासायनिक प्रक्रियाएं भी होने का अन्देशा रहता है.
लेकिन तीता को यह सब कैसे याद रहता क्योंकि वह तो ग़ुलाबों का दस्ता मिलने से कांप रही थी; वह भी पेद्रो का दिया हुआ. बहन की शादी के बाद पहली बार उसके भीतर पेद्रो के लिए भावनाएं उमड़ रही थीं. पेद्रो ने औरों की चौकना निगाहों से बचकर उससे अपने प्रेम को दुबारा सुनिश्चित किया था. मामा एलेना की आंखें उतनी ही तेज़ थीं, पहले जैसी, क्योंकि उन्हें मालूम था कि पेद्रो और तीता के अकेले में मिलने का क्या परिणाम होगा. उन्होंने अपनी नायाब तरकीबों के चलते अपने मकसद में कामयाबी पाई थी - आज घर की स्त्रियों में तीता ही रसोईघर का ज़िम्मा सम्हालने की काबिलियत रखती थी. और रसोई के स्वाद, गन्ध और उनके प्रभाव मामा एलेना के शासन के परे थे.
(माफ़ करेंगे आज तबीयत नासाज़ होने की वजह से इतना ही टाइप कर पा रहा हूं. कल इस शानदार अध्याय का काफ़ी लम्बा हिस्सा आपको पढ़ने को मिलेगा. गारन्टी.)
अध्याय ३
मार्च
ग़ुलाब की पंखुड़ियों के सॉस में पकी बटेर
सामग्री:
१२ ग़ुलाब, लाल हों तो बेहतर
१२ अखरोट
२ छोटे चम्मच मक्खन
२ छोटे चम्मच स्टार्च
२ बूंदें ग़ुलाब का अर्क
२ छोटे चम्मच सौंफ़
२ छोते चम्मच शहद
२ फांक लहसुन
६ बटेर
१ पिताया
बनाने की विधि:
ग़ुलाब की पंखुड़ियों को सावधानी से अलग करें. कोशिश करें कि कांटे उंगलियों में न चुभें क्योंकि इस से दर्द तो होता ही है. पंखुड़ियों में ख़ूमन लग जाने से न केवल व्यंजन का स्वाद बदल सकता है, ख़तरनाक रासायनिक प्रक्रियाएं भी होने का अन्देशा रहता है.
लेकिन तीता को यह सब कैसे याद रहता क्योंकि वह तो ग़ुलाबों का दस्ता मिलने से कांप रही थी; वह भी पेद्रो का दिया हुआ. बहन की शादी के बाद पहली बार उसके भीतर पेद्रो के लिए भावनाएं उमड़ रही थीं. पेद्रो ने औरों की चौकना निगाहों से बचकर उससे अपने प्रेम को दुबारा सुनिश्चित किया था. मामा एलेना की आंखें उतनी ही तेज़ थीं, पहले जैसी, क्योंकि उन्हें मालूम था कि पेद्रो और तीता के अकेले में मिलने का क्या परिणाम होगा. उन्होंने अपनी नायाब तरकीबों के चलते अपने मकसद में कामयाबी पाई थी - आज घर की स्त्रियों में तीता ही रसोईघर का ज़िम्मा सम्हालने की काबिलियत रखती थी. और रसोई के स्वाद, गन्ध और उनके प्रभाव मामा एलेना के शासन के परे थे.
(माफ़ करेंगे आज तबीयत नासाज़ होने की वजह से इतना ही टाइप कर पा रहा हूं. कल इस शानदार अध्याय का काफ़ी लम्बा हिस्सा आपको पढ़ने को मिलेगा. गारन्टी.)
Thursday, April 28, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - ११
(पिछली किस्त से जारी)
"कुछ नहीं मामी."
"तुम्हारी चालें में अच्छी तरह समझती हूं. मुझे उल्लू बनाने की कोशिश मत करना. खबरदार कभॊ पेद्रो के नज़दीक फटकने की भी कोशिश की तो."
मामा एलेना की धमकी के कारण वह जानबूझकर पेद्रो से दूर रही. लेकिन उसके चेहरे से खुशी के भावों को हटा पाना असम्भव था. अचानक इस शादी का उसके लिए एक विशेष महत्व हो गया.. अब पेद्रो और रोसौअरा को एक मेज़ से दूसरी मेज़ पर जाकर मेहमानों से बात करते, वाल्ज़ करते या केक काटते देखकर तीता पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. अब वह जानती थी कि पेदो उस से प्यार करता था. दावत खत्म होने की प्रतीक्षा उसे मारे डाल रही थी क्योंकि वह भागकर नाचा को सब कुछ बताना चाहती थी. कारेन्यो की ’एटीकेट मैन्युएल’ के हिसाब से वह तब तक मेज़ से उठ ही नहीं सकती थी. सो वह आसमान को देखति रही और क्र्क खाती रही. वह अपने आप में इतनी मशगूल थी कि उसने देखा नहीं - उसके इर्द-गोर्द अजीब सी बात हो रही थी. केक का टुकड़ा खाते ही हर मेहमान का दिल इच्छाओं से भर आया. यहां तक कि पेद्रो जो हमेशा दुरुस्त रहता था, अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया. मामा एलेना जिन्होंने अपने पति की मौत पर एक आंसू तक नहीं बहाया था, चुपके-चुपके सुबक रही थीं. लेकिन यह रुदन एक अजीब तरह के नशे का पहला लक्षण था - दर्द और कुण्ठा का अजीब तीखा नशा - जल्दी ही तमाम मेहमान बगीचे में, बालकनी में और बथरूम में बिखरे पड़े थे और अपने भूले-बिसरे प्यार को याद कर रहे थे.हर कोई. कई लोग समय पर बाथरूम नहीं पहुंच पाए और वे भी बालकनी में कई और लोगों के साथ खड़े हो गए, जहां सामूहिक रूप से उल्टियां की जा रही थीं. केवल एक ही व्यक्ति इस से बच पाया. तीता पर केक का कोई असर नहीं हुआ. अपना केक खत्म करते ही वह दावत से उठकर चली गई- नाचा को बताने के लिए कि पेद्रो केवल उसी से प्यार करता है. नाचा के चेहरे पर आने वाली खुशी की कल्पना करती हुई तीता ने अगल-बगल हो रही गतिविधियों पर ध्यान ही नहीं दिया. उस के हर कदम के साथ हालत बिगड़ती जा रही थी,
उल्टी करने की कोशिश करती हुई रोसौरा अपनी जगह से उठ खड़ी हुई.
उसने उबकाई को काबू पाने का प्रयास किया पर्वह काफ़ी मुश्किल था.. उसको अब एक ही चिन्ता थी - अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की गन्दगी से अपनी शादी की पोशाक को बचा पाना, पर अचानक वह फिसली और सर से पांव तक उलती में सन गई. सड़ांध की नदी में वह अवश कई गज बहती गई और पेद्रो की भयाक्रान्त आंखों के सामने ज्वालामुखी की तरह उसके मुंह से बड़ी मात्रा में उल्टी निकलने लगी.रोसौरा ने खट्टे मन से शिकायतें कीं इ उसकी शादी तबाह हो गई और दुनिया की कोई भी ताकत उसे यह मानने को यैयार नहीं कर सकती थी कि तीता ने जान बूझ कर केक में कोई चीज़ नहीं मिलाई थी.
रात भर रोसौरा कराहती रही और उस चादर का ख्याल भी उसे नहीं आया जिसे काढ़ने में इतना समय लगा था. पेद्रो ने तुरन्त कहा कि वे अपनी सुहागरात फिर कही मना लेंगे. लेकिन उनकी सुहागरात महीनों तक नहीं हो सकी जब एक बार हिम्मत कर के रोसौरा ने उस से कहा कि वह बिल्कुल ठीक हो चुकी है. उस रत, जब पेद्रो को आभास हुआ कि वह इस वैवाहिक ज़िम्म्जेदारि से नहीं बच सकेगा, वह उस बिस्तर पर झुका जिस पर शादी की चादर फैली हुई थी और उसने प्रार्थना की -
"ईश्वर, यह किसी वासना के लिए नहीं बल्कि एक शिशु के लिए होगा जो तुम्हारा सेवक होगा."
तीता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस दुर्भाग्यपूर्ण विवाह को पूर्ण होने में इताअ समय लगा होगा पर उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था.
तीता की चिन्ता थी अपनी जान बचाने की. शादी की रात मामा एलेना ने उसे इतना पीटा जितना वह कभी नहीं पिटी थी. अपने ज़ख़्मों के भर जाने की प्रतीक्षा में वह दो हफ़्ते बिस्तर पर लेटी रही थी. मामा एलेना ने वहशियों की तरह उसे इसलिए पीटा कि उन्हें यकीन था तीता ने नाचा के साथ मिलकर केक में उल्टी करने वाली दवाई मिलाई थी. तीता उन्हें यह विश्वास नहीं दिला पाई कि उसने केवल एक अतिरिक्त चीज़ केक में मिलाई थी - वे आम्सू जो केक बनाते समय उसकी आंखों से निकले थे, इसका सबूत नाचा भी नहीं दे पाई - शादी की रात जब तीता नाचा को ढूंढ़ने निकली थी उसने नाचा को मरा हुआ पाया. नाचा की आंखें खुली हुई थीं, दवा वाली पत्तियां उसके माथे पर धरी हुई थीं और उसके हाथों ने उसके मंगेतर की तस्वीर को कसकर जकड़ा हुआ था.
(अध्याय दो समाप्त - आगे से अध्याय तीन ग़ुलाब की पंखुड़ियों के सॉस में पकी बटेर)
"कुछ नहीं मामी."
"तुम्हारी चालें में अच्छी तरह समझती हूं. मुझे उल्लू बनाने की कोशिश मत करना. खबरदार कभॊ पेद्रो के नज़दीक फटकने की भी कोशिश की तो."
मामा एलेना की धमकी के कारण वह जानबूझकर पेद्रो से दूर रही. लेकिन उसके चेहरे से खुशी के भावों को हटा पाना असम्भव था. अचानक इस शादी का उसके लिए एक विशेष महत्व हो गया.. अब पेद्रो और रोसौअरा को एक मेज़ से दूसरी मेज़ पर जाकर मेहमानों से बात करते, वाल्ज़ करते या केक काटते देखकर तीता पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. अब वह जानती थी कि पेदो उस से प्यार करता था. दावत खत्म होने की प्रतीक्षा उसे मारे डाल रही थी क्योंकि वह भागकर नाचा को सब कुछ बताना चाहती थी. कारेन्यो की ’एटीकेट मैन्युएल’ के हिसाब से वह तब तक मेज़ से उठ ही नहीं सकती थी. सो वह आसमान को देखति रही और क्र्क खाती रही. वह अपने आप में इतनी मशगूल थी कि उसने देखा नहीं - उसके इर्द-गोर्द अजीब सी बात हो रही थी. केक का टुकड़ा खाते ही हर मेहमान का दिल इच्छाओं से भर आया. यहां तक कि पेद्रो जो हमेशा दुरुस्त रहता था, अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया. मामा एलेना जिन्होंने अपने पति की मौत पर एक आंसू तक नहीं बहाया था, चुपके-चुपके सुबक रही थीं. लेकिन यह रुदन एक अजीब तरह के नशे का पहला लक्षण था - दर्द और कुण्ठा का अजीब तीखा नशा - जल्दी ही तमाम मेहमान बगीचे में, बालकनी में और बथरूम में बिखरे पड़े थे और अपने भूले-बिसरे प्यार को याद कर रहे थे.हर कोई. कई लोग समय पर बाथरूम नहीं पहुंच पाए और वे भी बालकनी में कई और लोगों के साथ खड़े हो गए, जहां सामूहिक रूप से उल्टियां की जा रही थीं. केवल एक ही व्यक्ति इस से बच पाया. तीता पर केक का कोई असर नहीं हुआ. अपना केक खत्म करते ही वह दावत से उठकर चली गई- नाचा को बताने के लिए कि पेद्रो केवल उसी से प्यार करता है. नाचा के चेहरे पर आने वाली खुशी की कल्पना करती हुई तीता ने अगल-बगल हो रही गतिविधियों पर ध्यान ही नहीं दिया. उस के हर कदम के साथ हालत बिगड़ती जा रही थी,
उल्टी करने की कोशिश करती हुई रोसौरा अपनी जगह से उठ खड़ी हुई.
उसने उबकाई को काबू पाने का प्रयास किया पर्वह काफ़ी मुश्किल था.. उसको अब एक ही चिन्ता थी - अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की गन्दगी से अपनी शादी की पोशाक को बचा पाना, पर अचानक वह फिसली और सर से पांव तक उलती में सन गई. सड़ांध की नदी में वह अवश कई गज बहती गई और पेद्रो की भयाक्रान्त आंखों के सामने ज्वालामुखी की तरह उसके मुंह से बड़ी मात्रा में उल्टी निकलने लगी.रोसौरा ने खट्टे मन से शिकायतें कीं इ उसकी शादी तबाह हो गई और दुनिया की कोई भी ताकत उसे यह मानने को यैयार नहीं कर सकती थी कि तीता ने जान बूझ कर केक में कोई चीज़ नहीं मिलाई थी.
रात भर रोसौरा कराहती रही और उस चादर का ख्याल भी उसे नहीं आया जिसे काढ़ने में इतना समय लगा था. पेद्रो ने तुरन्त कहा कि वे अपनी सुहागरात फिर कही मना लेंगे. लेकिन उनकी सुहागरात महीनों तक नहीं हो सकी जब एक बार हिम्मत कर के रोसौरा ने उस से कहा कि वह बिल्कुल ठीक हो चुकी है. उस रत, जब पेद्रो को आभास हुआ कि वह इस वैवाहिक ज़िम्म्जेदारि से नहीं बच सकेगा, वह उस बिस्तर पर झुका जिस पर शादी की चादर फैली हुई थी और उसने प्रार्थना की -
"ईश्वर, यह किसी वासना के लिए नहीं बल्कि एक शिशु के लिए होगा जो तुम्हारा सेवक होगा."
तीता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस दुर्भाग्यपूर्ण विवाह को पूर्ण होने में इताअ समय लगा होगा पर उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था.
तीता की चिन्ता थी अपनी जान बचाने की. शादी की रात मामा एलेना ने उसे इतना पीटा जितना वह कभी नहीं पिटी थी. अपने ज़ख़्मों के भर जाने की प्रतीक्षा में वह दो हफ़्ते बिस्तर पर लेटी रही थी. मामा एलेना ने वहशियों की तरह उसे इसलिए पीटा कि उन्हें यकीन था तीता ने नाचा के साथ मिलकर केक में उल्टी करने वाली दवाई मिलाई थी. तीता उन्हें यह विश्वास नहीं दिला पाई कि उसने केवल एक अतिरिक्त चीज़ केक में मिलाई थी - वे आम्सू जो केक बनाते समय उसकी आंखों से निकले थे, इसका सबूत नाचा भी नहीं दे पाई - शादी की रात जब तीता नाचा को ढूंढ़ने निकली थी उसने नाचा को मरा हुआ पाया. नाचा की आंखें खुली हुई थीं, दवा वाली पत्तियां उसके माथे पर धरी हुई थीं और उसके हाथों ने उसके मंगेतर की तस्वीर को कसकर जकड़ा हुआ था.
(अध्याय दो समाप्त - आगे से अध्याय तीन ग़ुलाब की पंखुड़ियों के सॉस में पकी बटेर)
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - १०
(पिछली किस्त से जारी)
"क्या तुमने तीता को देखा? बेचारी. उसकी बहन उसके प्रेमी से शादी करने जा रही है. एक दिन मैंने उन दोनों को बाज़ार में एक दूसरे का हाथ थामे हुए देखा था. वे बहुत ख़ुश लग रहे थे."
"क्या बात करती हो? पाकीता का कहना है कि एक दिन चर्च में उसने पेद्रो को तीता को प्रेमपत्र देते हुए देखा था - ख़ुशबू वगैरह के साथ."
"लोग कह रहे हैं कि वे एक ही मकान में रहने वाले है. अगर मैं मामा एलेना की जगह होती तो ऐसा हरगिज़ न होने देती."
"पता नहीं कैसे वो ये सब सहन कर ले रही हैं, कितनी बातें हो रही हैं पूरे इलाके में."
तीता ने इन बातों की ज़रा भी परवाह नहीं की. वह पराजित की भूमिका निभाने के लिए नहीं बनी थी, वह विजेता की मुद्रा ओढ़ेगी. एक महान अभिनेत्री की तरह उसमे अपना हिस्सा बख़ूबी निभाया, उन ची़ओं के बारे में सोचते हुए जिनका शादी, पादरी, चर्च, अंगूठी वगैरह से कोई लेना-देना नहीं था.
उसे याद आया एक दिन जब वह नौ साल की थी उसने लड़कों के साथ खेलने का फ़ैसला किया था. हालांकि उसे लड़कों के साथ खेलने की इजाज़त नहीं थी पर वह अपनी बहनों के खेलों से ऊब चुकी थी. गाम्व के कुछ लड़कों के साथ भागकर वह रियो ग्रान्दे नदी तक पहुंची. वहां तेज़ तैरने की बाज़ी लग गई. इसमें वह जीत गई थी - उसे याद आया उसे अपने ऊपर कितना गर्व हुआ था उस दिन.
एक और शान्त रविवार को उसने एक अन्य जीत हासिल की थी . वह चौदह की थी और अपनी बहनों के साथ घोड़ागाड़ी की सवारी पर निकली थी, जब एक शरारती लड़के ने पटाख़े चला दिए. घोड़े गांव की दिशा से बाहर भागते चले गए.
तीता ने कोचवान को एक तरफ़ धकेला और अकेले उन घोड़ों कॊ काबू किया. जब तक गांव के चार घुड़सवार उनकी मद को पहुंचते सब ठीक हो चुका था - उन्हें भयंकर आश्चर्य हुआ कि तीता ने अकेले ...
गांव वालों ने क्या ज़बरदस्त स्वागत किया था उसका.
तीता ने अपना ध्यान ऐसी ही स्मृतियों की तरफ़ लगाए रखा ताकि उसके चेहरे पर सन्तुष्ट मुस्कराहट बनी रह सके. लेकिन अब शादी के चुम्बन का समय था और रोसौरा को बधाई देनी थी. पेद्रो जो रोसौरा के साथ खड़ा था, उस से बोला -
"और मैं, क्या मुझे बधाई नहीं दोगी?"
"क्यों नहीं! मुझे उम्मीद है तुम प्रसन्न रहोगे."
पेद्रो इस समय उसके काफ़ी नज़दीक खड़ा था -जितना परम्परा अनुमति देती थी उस से अधिक. इस मौके का फ़ायदा उठाकर पेद्रो उसके कान में फुसफुसाया -
"मुझे उम्मीद है मैं प्रसन्न रहूंगा क्योंकि इस शादी के माध्यम से मैंने वह पा लिया है जो मैं चाहता था - तुम्हारे नज़दीक रह पाने का अवसर क्योंकि मैं केवल तुम्हें सच्चा प्यार करता हूं."
ताज़ी हवा की तरह थे ये शब्द तीता के लिए. जो आग बिल्कुल बुझ चुकी थी वह दुबारा जल गई. पिछले कुछ महीनों तक उसे अपनी भावनाओं को लगातार छिपाना पड़ा था पर अब उसके चेहरे पर खुशी और सन्तोष के भाव स्पष्ट थे. उसकी आन्तरिक ख़ुशी जो मर चुकी थी, पेद्रो की गरम सांस से पुनर्जीवित हो उठी, जो उसकी गरदन पर पड़ रही थी. उसके गरम हाथों का उसकी पीठ पर स्पर्श, उसका सीना तीता की छातियों से सटा हुआ ... वह हमेशा पेद्रो की बांहों में रह सकति थी पर मामा एलेना की तीखी निगाह देखकर वह एकदम से अलग हो गई. मामा एलेना तीता के पास आईं -
"क्या कहा पेद्रो ने तुमसे?"
(जारी - अगली किस्त में अध्याय दो का समापन)
"क्या तुमने तीता को देखा? बेचारी. उसकी बहन उसके प्रेमी से शादी करने जा रही है. एक दिन मैंने उन दोनों को बाज़ार में एक दूसरे का हाथ थामे हुए देखा था. वे बहुत ख़ुश लग रहे थे."
"क्या बात करती हो? पाकीता का कहना है कि एक दिन चर्च में उसने पेद्रो को तीता को प्रेमपत्र देते हुए देखा था - ख़ुशबू वगैरह के साथ."
"लोग कह रहे हैं कि वे एक ही मकान में रहने वाले है. अगर मैं मामा एलेना की जगह होती तो ऐसा हरगिज़ न होने देती."
"पता नहीं कैसे वो ये सब सहन कर ले रही हैं, कितनी बातें हो रही हैं पूरे इलाके में."
तीता ने इन बातों की ज़रा भी परवाह नहीं की. वह पराजित की भूमिका निभाने के लिए नहीं बनी थी, वह विजेता की मुद्रा ओढ़ेगी. एक महान अभिनेत्री की तरह उसमे अपना हिस्सा बख़ूबी निभाया, उन ची़ओं के बारे में सोचते हुए जिनका शादी, पादरी, चर्च, अंगूठी वगैरह से कोई लेना-देना नहीं था.
उसे याद आया एक दिन जब वह नौ साल की थी उसने लड़कों के साथ खेलने का फ़ैसला किया था. हालांकि उसे लड़कों के साथ खेलने की इजाज़त नहीं थी पर वह अपनी बहनों के खेलों से ऊब चुकी थी. गाम्व के कुछ लड़कों के साथ भागकर वह रियो ग्रान्दे नदी तक पहुंची. वहां तेज़ तैरने की बाज़ी लग गई. इसमें वह जीत गई थी - उसे याद आया उसे अपने ऊपर कितना गर्व हुआ था उस दिन.
एक और शान्त रविवार को उसने एक अन्य जीत हासिल की थी . वह चौदह की थी और अपनी बहनों के साथ घोड़ागाड़ी की सवारी पर निकली थी, जब एक शरारती लड़के ने पटाख़े चला दिए. घोड़े गांव की दिशा से बाहर भागते चले गए.
तीता ने कोचवान को एक तरफ़ धकेला और अकेले उन घोड़ों कॊ काबू किया. जब तक गांव के चार घुड़सवार उनकी मद को पहुंचते सब ठीक हो चुका था - उन्हें भयंकर आश्चर्य हुआ कि तीता ने अकेले ...
गांव वालों ने क्या ज़बरदस्त स्वागत किया था उसका.
तीता ने अपना ध्यान ऐसी ही स्मृतियों की तरफ़ लगाए रखा ताकि उसके चेहरे पर सन्तुष्ट मुस्कराहट बनी रह सके. लेकिन अब शादी के चुम्बन का समय था और रोसौरा को बधाई देनी थी. पेद्रो जो रोसौरा के साथ खड़ा था, उस से बोला -
"और मैं, क्या मुझे बधाई नहीं दोगी?"
"क्यों नहीं! मुझे उम्मीद है तुम प्रसन्न रहोगे."
पेद्रो इस समय उसके काफ़ी नज़दीक खड़ा था -जितना परम्परा अनुमति देती थी उस से अधिक. इस मौके का फ़ायदा उठाकर पेद्रो उसके कान में फुसफुसाया -
"मुझे उम्मीद है मैं प्रसन्न रहूंगा क्योंकि इस शादी के माध्यम से मैंने वह पा लिया है जो मैं चाहता था - तुम्हारे नज़दीक रह पाने का अवसर क्योंकि मैं केवल तुम्हें सच्चा प्यार करता हूं."
ताज़ी हवा की तरह थे ये शब्द तीता के लिए. जो आग बिल्कुल बुझ चुकी थी वह दुबारा जल गई. पिछले कुछ महीनों तक उसे अपनी भावनाओं को लगातार छिपाना पड़ा था पर अब उसके चेहरे पर खुशी और सन्तोष के भाव स्पष्ट थे. उसकी आन्तरिक ख़ुशी जो मर चुकी थी, पेद्रो की गरम सांस से पुनर्जीवित हो उठी, जो उसकी गरदन पर पड़ रही थी. उसके गरम हाथों का उसकी पीठ पर स्पर्श, उसका सीना तीता की छातियों से सटा हुआ ... वह हमेशा पेद्रो की बांहों में रह सकति थी पर मामा एलेना की तीखी निगाह देखकर वह एकदम से अलग हो गई. मामा एलेना तीता के पास आईं -
"क्या कहा पेद्रो ने तुमसे?"
(जारी - अगली किस्त में अध्याय दो का समापन)
Wednesday, April 27, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - ९
(पिछली किस्त से जारी)
फ़ौन्डेन्ट आइसिंग के लिए:
८०० ग्राम चीनी का बुरादा
६० बूंदें नींबू का रस और पर्याप्त पानी
चीनी और पानी को एक बरतन में घोल कर गरम करें, लगातार हिलाएं जब तक कि वह उबलने लगे. इसे छानकर दूसरे बरतन में डालें और दुबारा गरम करें, नींबू का रस डालें और पकाएं जब तक कि चाशनी तैयार न हो जाए. साथ ही बरतन के किनारों को भीगे कपड़े द्र पोंछते रहें ताकि चीनी सूख न जाए. अब इस मिश्रण को किसी नम बरतन में डालें थोड़ा पानी छिड़कें और ज़रा ठण्डा होने दें.
जब यह ठण्डा हो जाए, इसे लकड़ी के चम्मच से फेंटें जब तक यह क्रीम जैसा न दिखाई देने लगे.
केक को आइस करने के लिए फ़ौन्डेन्ट में एक चम्मच दूध मिलाकर मुलायम होन्व तक गरम करें, एक बूंद खाने का लाल रंग मिलाएं और केक के केवल ऊपरी भाग की इस फ़ैन्डेन्ट से आइसिंग करें.
"बच्ची, मैंने इसे पहले ही मिला दिया है, देखती नहीं यह कितना गुलाबी हो चुका है?"
"नहीं तो ..."
"अब जाकर सो जाओ मेरी बच्ची. मैरिन्गे आइसिंग मैं ख़ुद तैयार कर लूंगी. केवल बरतन जानता है उबलते हुए सूप को कैसा लगता है.ल्र्किन मैं जानती हूंतुम्हें कैसा महसूस हो रहा है. और रोना बन्द करो. तुम मैरिन्गे को ज़्यादा ही गीला कर दे रही हो. फ़िर यह जम भी नहीं पाएगा - अब चलो - जाओ."
नाचा ने तीता पर चुम्बनों की बौछार करते हुए उसे रसोई से बाहर कर दिया. इन नए आंसुओंको तीता नहीं समझ पाई, लेकिन वे निकल चुके थे और उन्होंने मैरिन्गे का वान्छित गाढ़ापन बदल दिया था. अब केक की मैरिन्गे आइसिंग ल्करना दूने परिश्रम का काम होगा. अब नाचा को यह करना था कि जल्दी से जल्दी इस काम मो पूरा कर के सो सके. मैरिन्गे आइसिंग के लिए दस अण्डों की सफ़ेदी और पांच सौ ग्राम चीनी फेंटनी होती है जब तक कि गाढ़ी चाशनी न तैयार हो जाए.
मैरिन्गे को फेंट चुकने के बाद नाचा को ख़्याल आया कि अपनी उंगलियॊम में लगी हुई आइसिंग को चख कर देखे कि कहीं तीता के आंसुओं ने उसका स्वाद तो बदल नहीं दिया है. चखने पर उसने पाया कि स्वाद में कोई बदलाव नहीं आया है.लेकिन बिना किसी मनःस्थिति के नाचा का मन इच्छाओं से भर उठा. एक के बाद उसकी स्मृति में वे तमाम शादियां आती गईं जिनके लिए उसने खाना तैयार किया था. दे ला गार्ज़ा परिवार की हर शादी में वह इस भ्रम के साथ खाना बनाती गई कि अगली शादी उसकी होगी. कम से कम इसका भ्रम तो रहता ही था. पिचासी की उमर में रोने का कोई अर्थ नहीं था - खासतौर पर उस शादी के लिए जो हुई ही नहीं, हालांकि उसका एक मंगेतर था. हां था एक मंगेतर उसका. लेकिन मामा एलेना की मामा ने उसका बोरिया-बिस्तर बांधकर भगा दिया था. तब से नाचा बस दूसरों की शादियों की खुशियां मनाया करती थी - बरसों से, बिना शिकायत किए. तो अब क्या शिकायत थी उसे? य्श कोई मज़ाक हो सकता था पर उसकी समझ में कुछ नहीं आया. अपनी सामर्थ्यानुसार उसने केक को मैरिन्गे आइसिंग से सजायाऔर अपने कमरे में चली आई - उसके दिल में एक तीखा दर्द था. वह पूरी रात रोती रही और अगली सुबह इस लायक नहीं थी कि शादी के किसी भी काम में मदद दे पाती.
नाचा की जगह लेने को तीता कुछ भी कर सकती थी पर तीता को न केवल विवाह की रस्म के समय उपस्थित रहना थाअ बल्कि यह भी निश्चित करना था कि उसका चेहरा उसकी भावनाओं को छिपाए रहे. उसे लगा वह ऐसा कर पाएगी जब तक कि उसकी आंखें पेद्रो सी आंखों से न टकराएं. ऐसा होने पर शान्त और स्थिरचित्त होने का उसका दावा बिखर कर रह जाता.
उसे मालूम था कि अपनी बहन रोसौरा के स्थान पर स्वयं वह लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई थी. मेहमान न केवल एक सामाजिक रस्म निबटा रहे थे, वे तीता की यातना को भी देखना चाहते थे.लेकिन वह उन्हें सन्तुष्ट नहीं होने देगी. बिल्कुल नहीं. चर्च में चलते हुए उसने तमाम लोगों की फुसफुसाहटें सुनीं जो उसकी पीठ पर घाव करती रहीं.
(जारी)
फ़ौन्डेन्ट आइसिंग के लिए:
८०० ग्राम चीनी का बुरादा
६० बूंदें नींबू का रस और पर्याप्त पानी
चीनी और पानी को एक बरतन में घोल कर गरम करें, लगातार हिलाएं जब तक कि वह उबलने लगे. इसे छानकर दूसरे बरतन में डालें और दुबारा गरम करें, नींबू का रस डालें और पकाएं जब तक कि चाशनी तैयार न हो जाए. साथ ही बरतन के किनारों को भीगे कपड़े द्र पोंछते रहें ताकि चीनी सूख न जाए. अब इस मिश्रण को किसी नम बरतन में डालें थोड़ा पानी छिड़कें और ज़रा ठण्डा होने दें.
जब यह ठण्डा हो जाए, इसे लकड़ी के चम्मच से फेंटें जब तक यह क्रीम जैसा न दिखाई देने लगे.
केक को आइस करने के लिए फ़ौन्डेन्ट में एक चम्मच दूध मिलाकर मुलायम होन्व तक गरम करें, एक बूंद खाने का लाल रंग मिलाएं और केक के केवल ऊपरी भाग की इस फ़ैन्डेन्ट से आइसिंग करें.
"बच्ची, मैंने इसे पहले ही मिला दिया है, देखती नहीं यह कितना गुलाबी हो चुका है?"
"नहीं तो ..."
"अब जाकर सो जाओ मेरी बच्ची. मैरिन्गे आइसिंग मैं ख़ुद तैयार कर लूंगी. केवल बरतन जानता है उबलते हुए सूप को कैसा लगता है.ल्र्किन मैं जानती हूंतुम्हें कैसा महसूस हो रहा है. और रोना बन्द करो. तुम मैरिन्गे को ज़्यादा ही गीला कर दे रही हो. फ़िर यह जम भी नहीं पाएगा - अब चलो - जाओ."
नाचा ने तीता पर चुम्बनों की बौछार करते हुए उसे रसोई से बाहर कर दिया. इन नए आंसुओंको तीता नहीं समझ पाई, लेकिन वे निकल चुके थे और उन्होंने मैरिन्गे का वान्छित गाढ़ापन बदल दिया था. अब केक की मैरिन्गे आइसिंग ल्करना दूने परिश्रम का काम होगा. अब नाचा को यह करना था कि जल्दी से जल्दी इस काम मो पूरा कर के सो सके. मैरिन्गे आइसिंग के लिए दस अण्डों की सफ़ेदी और पांच सौ ग्राम चीनी फेंटनी होती है जब तक कि गाढ़ी चाशनी न तैयार हो जाए.
मैरिन्गे को फेंट चुकने के बाद नाचा को ख़्याल आया कि अपनी उंगलियॊम में लगी हुई आइसिंग को चख कर देखे कि कहीं तीता के आंसुओं ने उसका स्वाद तो बदल नहीं दिया है. चखने पर उसने पाया कि स्वाद में कोई बदलाव नहीं आया है.लेकिन बिना किसी मनःस्थिति के नाचा का मन इच्छाओं से भर उठा. एक के बाद उसकी स्मृति में वे तमाम शादियां आती गईं जिनके लिए उसने खाना तैयार किया था. दे ला गार्ज़ा परिवार की हर शादी में वह इस भ्रम के साथ खाना बनाती गई कि अगली शादी उसकी होगी. कम से कम इसका भ्रम तो रहता ही था. पिचासी की उमर में रोने का कोई अर्थ नहीं था - खासतौर पर उस शादी के लिए जो हुई ही नहीं, हालांकि उसका एक मंगेतर था. हां था एक मंगेतर उसका. लेकिन मामा एलेना की मामा ने उसका बोरिया-बिस्तर बांधकर भगा दिया था. तब से नाचा बस दूसरों की शादियों की खुशियां मनाया करती थी - बरसों से, बिना शिकायत किए. तो अब क्या शिकायत थी उसे? य्श कोई मज़ाक हो सकता था पर उसकी समझ में कुछ नहीं आया. अपनी सामर्थ्यानुसार उसने केक को मैरिन्गे आइसिंग से सजायाऔर अपने कमरे में चली आई - उसके दिल में एक तीखा दर्द था. वह पूरी रात रोती रही और अगली सुबह इस लायक नहीं थी कि शादी के किसी भी काम में मदद दे पाती.
नाचा की जगह लेने को तीता कुछ भी कर सकती थी पर तीता को न केवल विवाह की रस्म के समय उपस्थित रहना थाअ बल्कि यह भी निश्चित करना था कि उसका चेहरा उसकी भावनाओं को छिपाए रहे. उसे लगा वह ऐसा कर पाएगी जब तक कि उसकी आंखें पेद्रो सी आंखों से न टकराएं. ऐसा होने पर शान्त और स्थिरचित्त होने का उसका दावा बिखर कर रह जाता.
उसे मालूम था कि अपनी बहन रोसौरा के स्थान पर स्वयं वह लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई थी. मेहमान न केवल एक सामाजिक रस्म निबटा रहे थे, वे तीता की यातना को भी देखना चाहते थे.लेकिन वह उन्हें सन्तुष्ट नहीं होने देगी. बिल्कुल नहीं. चर्च में चलते हुए उसने तमाम लोगों की फुसफुसाहटें सुनीं जो उसकी पीठ पर घाव करती रहीं.
(जारी)
Tuesday, April 26, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - ८
(पिछली किस्त से जारी)
फ़िलिंग के लिए -
१५० ग्राम खुबानी का पेस्ट
१५० ग्राम चीनी का बुरादा
फ़िलिंग बनाने की विधि -
खुबानी के पेस्ट को थोड़े से पानी के साथ उबलने तक गरम करें. अब इसे एक बरतन में चीनी के साथ गरम करें. इसे धीमे धीमे चलाएं ताकि यह मुरब्बे जैसा दीखने लगे. इसे थोड़ा सा ठण्डा करें और केक के बीच की परत पर फैला दें. जाहिर है केक को पहले ही परतों में काट किया जाना चाहिए.
भाग्यवश नाचा और तीता न पहले से ही कई मर्तबान भर कर फलों के मुरब्बे तैयार कर रखे थे - खुबानी, अनन्नास इत्यादि के. यह काम उन्होंने शादी के महीना भर पहले ही कर लिया था और अब उन्हें फ़िलिंग के लिए मुरब्बे बनाने की ज़रूरत नहीं थी.
वे अक्सर काफ़ी मात्रा में फलोंके मुरब्बे बनाया करती थीं - उन फलों के जो उन दिनों उग रहे होते थे. यह काम वे रसोई के पिछवाड़े किया करती थीं जहां तांबे के एक बड़े बरतन में मुरब्बा बनाया जाता था. बरतन को आग के ऊपर रखा जाता और मिश्रण को चलाने के लिए उन्हें अपनी बांहों को पुराने कपड़ों से ढंकना पड़ता था ताकि गरम बुलबुलों से उनकी त्वचा जल न जाए.
जिस क्षण तीता ने म्रब्बे का मर्तबान खोला, खुबानियों की महक ने उसे उस दोपहर के बीच पहुंचा दिया जब यह मुरब्बा बनाया गया था. तीता किचन गार्डन से खुबानियां अपनी स्कर्ट में रखकर ला रही थी क्योंकि वह टोकरी लाना भूल गई थी. तीता अपनी स्कर्ट को आगे उठाकर खुबानियां रसोई में ला रही थी कि पेद्रो से टकराकर हक्कीबक्की हो गई. पेद्रो अपनी घोड़ागाड़ी तैयार करने बाहर निकल रहा था. उसे शहर जाकर कई निमन्त्रण देने थे. जिस व्यक्ति को यह काम करना था वह उस दिन नहीं आया सो यह काम पेद्रो को करना था. जब नाचा ने पेद्रो को रसोई में घुसते देखा, वह बहाना बनाकर रसोई से बाहर चली गई. अचम्भे में तीता से कुछ खुबानियां नीचे गिर गईं. पेद्रो तुरन्त नीचे झुककर उन्हें उठाने लगा. झुकते समय उसने तीता की अनावृत्त टांग का एक हिस्सा देख लिया.
ताकि पेद्रो उसकी टांग न देख पाए तीता ने अपना स्कर्ट नीचे गिरा दिया. ऐसा करते ही सारी खुबानियां पेद्रो के सिर पर जा गिरीं.
"माफ़ करना पेद्रो, क्या तुम्हें चोट लगी?
"नहीं नहीं. चोट तो तुम्हें मैंने पहुंचाई है. दर असल मैं कहना चाहता हूं कि मेरी इच्छा ..."
"मैंने कोई स्पष्टीकरण तो नहीं मांगा."
"तुम्हें मुझे कुछ कहने का मौका देना होगा ..."
"मैने एक बार ऐसा किया था और मुझे झूठ ही सुनने को मिला. अब और कुछ सुनने की मेरी इच्छा नहीं है ..."
इसके साथ ही तीता रसोई से भागकर उस कमरे में पहुंची जहां चेन्चा और गरत्रूदिस उस चादर को काढ़ रहे थे जो खास शादी के लिए तैयार की जा रही थी. वह एक सफ़ेद रेशमी चादर थी जिसके बीच में वे एक जटिल नमूना काढ़ रहे थे. इस हिस्से में कुछ भाग खुला हुआ था. कढ़ाई इस तरह थी कि सुहागरात के समय दुल्हन के केवल जननांग इस खुले भाग के ठीक नीचे हों. राजनैतिक अस्थिरता के दौर में भी उन्हें भाग्यवश फ़्रैन्च सिक मिल गई थी. क्रान्ति के कारण सुरक्षित यात्रा करना असम्भव हो गया था. वह तो एक चीनी स्मगलर की कृपा रही जो उन्हें यह कपड़ा मिल सका. मामा एलेना ने अपनी किसी भी बेटी को शहर भेजने का खतरा मोल नहीं लिया था, जहां से वे रोसौरा की पोशाक का कपड़ा वगैरह ले कर आतीं. यह चीनी आदमी बेहद चालाक था. उत्तर की क्रान्तिकारी सेना द्वारा जारी किए गए नोटों को वह राजधानी में ले लेता था, हालांकि बेची हुई चीज़ों की कीमत के सामने वे नोट बेकार होते थे परन्तु उत्तर में इन नोटोंकी पूरी कीमत मिलती थी जहां वह इनके बदले सामान खरीदा करता था.
उत्तर में वह राजधानी से जारी किए गए नोट स्वीकार कर लेता - यहां इन नोटों की कीमत वैसी ही होती थी जैसी राजधानी में क्रान्तिकारी सेना द्वारा जारी किए गए नोटों की. अन्ततः उसने पूरी क्रान्ति को बेचकर लाखों बना लिए. लेकिन यहां महत्वपूर्ण यह है कि उसकी कृपा से रोसौरा अपनी सुहागरात के दिन सबसे महीन सबसे बेहतरीन कपड़े का आनन्द ले सकती थी.
तीता जैसे समाधिस्थ होकर उस कपड़े की चमकदार सफ़ेदी को देखती रही. हालांकि यह केवल कुछ सेकेण्ड ही रहा, लेकिन यह आंखों को चौंधिया देने को काफ़ी था. वह जहां भी देखती उसे केवल सफ़ेद रंग ही दिखाई दे रहा था. जब उसने रोसौरा को देखा, जो कुछ निमन्त्रण लिख रही थी, तीता को केवल एक बर्फ़ीला प्रेत नज़र आया. लेकिन तीता ने अपने भावों को जाहिर नहीं होने दिया - न ही किसी और ने उसकी स्थिति पर ध्यान दिया.
वह मामा एलेना के हाथों और डांट नहीं खाना चाहती थी. जब लोबो परिवार रोसौरा को उपहार देने आया, तीता कुछ देख नहीं पा रही थी. तीता यह भी नहीं जान पा रही थी कि रोसौरा को कौन बधाई दे रहा है. उसे तो केवल सफ़ेद कपड़ों में लिपटे प्रेत नज़र आ रहे थे. किस्मत से पाकीता लोबो की तीखी आवाज़ ने उसे अपनी समस्या का समधान दे दिया और बिना परेशानी के उसने लोबो परिवार का अभिवादन किया.
बाद में जब वह उन्हें छोड़ने रैन्च के प्रवेशद्वार तक गई तो उसे भान हुआ उसने ऐसी रात पहले कभी नहीं देखी थी - ंखों को अन्धा कर देने वाली चमकीली सफ़ेद रात.
अब वह केक की आइसिंग बनाते हुए अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थी क्योंकि उसे भय था फिर से वैसा ही होगा.चीनी की सफ़ेदी देखकर उसे डर लगा. वह खुद को शक्तिहीन पा रही थी. उसे लग रहा था कि सफ़ेद रंग कभी भी उसकी चेतना पर छा जाएगा और बचपन की तमाम स्मृतियां उसे घसीट रही थीं. मई के महीने वर्जिन मैरी को अर्पित किए जाने वाले सफ़ेद्फूलों की स्मृतियां, सफ़ेद कपड़े पहने कई लड़कियों के साथ वह चर्च के भीतर गी थी जहां सफ़ेद फूलौर सफ़ेद मोमबत्तियां वेदी के ऊपर रखी हुई थीं. सफ़ेद चर्च के शीशों से छनकर सफ़ेद रोशनी भीतर फैली हुई थी. उस चर्च में हमेशा वह यह सोचकर प्रवेश किया करती थी कि एक दिन वह किसी पुरुष की बांहों में उस चर्च में आएगी. टिता ने न केवल इस विचार को रोकना था, बल्कि उन सारी स्मृतियों को भी जिनसे उसे इतना दर्द पहुंचा था. उसे अपनी बहन की शादी के केक की आइसिंग तैयार करनी थी. बेहद श्रम करते हुए उसने आइसिंग बनाना शुरू किया.
(जारी)
फ़िलिंग के लिए -
१५० ग्राम खुबानी का पेस्ट
१५० ग्राम चीनी का बुरादा
फ़िलिंग बनाने की विधि -
खुबानी के पेस्ट को थोड़े से पानी के साथ उबलने तक गरम करें. अब इसे एक बरतन में चीनी के साथ गरम करें. इसे धीमे धीमे चलाएं ताकि यह मुरब्बे जैसा दीखने लगे. इसे थोड़ा सा ठण्डा करें और केक के बीच की परत पर फैला दें. जाहिर है केक को पहले ही परतों में काट किया जाना चाहिए.
भाग्यवश नाचा और तीता न पहले से ही कई मर्तबान भर कर फलों के मुरब्बे तैयार कर रखे थे - खुबानी, अनन्नास इत्यादि के. यह काम उन्होंने शादी के महीना भर पहले ही कर लिया था और अब उन्हें फ़िलिंग के लिए मुरब्बे बनाने की ज़रूरत नहीं थी.
वे अक्सर काफ़ी मात्रा में फलोंके मुरब्बे बनाया करती थीं - उन फलों के जो उन दिनों उग रहे होते थे. यह काम वे रसोई के पिछवाड़े किया करती थीं जहां तांबे के एक बड़े बरतन में मुरब्बा बनाया जाता था. बरतन को आग के ऊपर रखा जाता और मिश्रण को चलाने के लिए उन्हें अपनी बांहों को पुराने कपड़ों से ढंकना पड़ता था ताकि गरम बुलबुलों से उनकी त्वचा जल न जाए.
जिस क्षण तीता ने म्रब्बे का मर्तबान खोला, खुबानियों की महक ने उसे उस दोपहर के बीच पहुंचा दिया जब यह मुरब्बा बनाया गया था. तीता किचन गार्डन से खुबानियां अपनी स्कर्ट में रखकर ला रही थी क्योंकि वह टोकरी लाना भूल गई थी. तीता अपनी स्कर्ट को आगे उठाकर खुबानियां रसोई में ला रही थी कि पेद्रो से टकराकर हक्कीबक्की हो गई. पेद्रो अपनी घोड़ागाड़ी तैयार करने बाहर निकल रहा था. उसे शहर जाकर कई निमन्त्रण देने थे. जिस व्यक्ति को यह काम करना था वह उस दिन नहीं आया सो यह काम पेद्रो को करना था. जब नाचा ने पेद्रो को रसोई में घुसते देखा, वह बहाना बनाकर रसोई से बाहर चली गई. अचम्भे में तीता से कुछ खुबानियां नीचे गिर गईं. पेद्रो तुरन्त नीचे झुककर उन्हें उठाने लगा. झुकते समय उसने तीता की अनावृत्त टांग का एक हिस्सा देख लिया.
ताकि पेद्रो उसकी टांग न देख पाए तीता ने अपना स्कर्ट नीचे गिरा दिया. ऐसा करते ही सारी खुबानियां पेद्रो के सिर पर जा गिरीं.
"माफ़ करना पेद्रो, क्या तुम्हें चोट लगी?
"नहीं नहीं. चोट तो तुम्हें मैंने पहुंचाई है. दर असल मैं कहना चाहता हूं कि मेरी इच्छा ..."
"मैंने कोई स्पष्टीकरण तो नहीं मांगा."
"तुम्हें मुझे कुछ कहने का मौका देना होगा ..."
"मैने एक बार ऐसा किया था और मुझे झूठ ही सुनने को मिला. अब और कुछ सुनने की मेरी इच्छा नहीं है ..."
इसके साथ ही तीता रसोई से भागकर उस कमरे में पहुंची जहां चेन्चा और गरत्रूदिस उस चादर को काढ़ रहे थे जो खास शादी के लिए तैयार की जा रही थी. वह एक सफ़ेद रेशमी चादर थी जिसके बीच में वे एक जटिल नमूना काढ़ रहे थे. इस हिस्से में कुछ भाग खुला हुआ था. कढ़ाई इस तरह थी कि सुहागरात के समय दुल्हन के केवल जननांग इस खुले भाग के ठीक नीचे हों. राजनैतिक अस्थिरता के दौर में भी उन्हें भाग्यवश फ़्रैन्च सिक मिल गई थी. क्रान्ति के कारण सुरक्षित यात्रा करना असम्भव हो गया था. वह तो एक चीनी स्मगलर की कृपा रही जो उन्हें यह कपड़ा मिल सका. मामा एलेना ने अपनी किसी भी बेटी को शहर भेजने का खतरा मोल नहीं लिया था, जहां से वे रोसौरा की पोशाक का कपड़ा वगैरह ले कर आतीं. यह चीनी आदमी बेहद चालाक था. उत्तर की क्रान्तिकारी सेना द्वारा जारी किए गए नोटों को वह राजधानी में ले लेता था, हालांकि बेची हुई चीज़ों की कीमत के सामने वे नोट बेकार होते थे परन्तु उत्तर में इन नोटोंकी पूरी कीमत मिलती थी जहां वह इनके बदले सामान खरीदा करता था.
उत्तर में वह राजधानी से जारी किए गए नोट स्वीकार कर लेता - यहां इन नोटों की कीमत वैसी ही होती थी जैसी राजधानी में क्रान्तिकारी सेना द्वारा जारी किए गए नोटों की. अन्ततः उसने पूरी क्रान्ति को बेचकर लाखों बना लिए. लेकिन यहां महत्वपूर्ण यह है कि उसकी कृपा से रोसौरा अपनी सुहागरात के दिन सबसे महीन सबसे बेहतरीन कपड़े का आनन्द ले सकती थी.
तीता जैसे समाधिस्थ होकर उस कपड़े की चमकदार सफ़ेदी को देखती रही. हालांकि यह केवल कुछ सेकेण्ड ही रहा, लेकिन यह आंखों को चौंधिया देने को काफ़ी था. वह जहां भी देखती उसे केवल सफ़ेद रंग ही दिखाई दे रहा था. जब उसने रोसौरा को देखा, जो कुछ निमन्त्रण लिख रही थी, तीता को केवल एक बर्फ़ीला प्रेत नज़र आया. लेकिन तीता ने अपने भावों को जाहिर नहीं होने दिया - न ही किसी और ने उसकी स्थिति पर ध्यान दिया.
वह मामा एलेना के हाथों और डांट नहीं खाना चाहती थी. जब लोबो परिवार रोसौरा को उपहार देने आया, तीता कुछ देख नहीं पा रही थी. तीता यह भी नहीं जान पा रही थी कि रोसौरा को कौन बधाई दे रहा है. उसे तो केवल सफ़ेद कपड़ों में लिपटे प्रेत नज़र आ रहे थे. किस्मत से पाकीता लोबो की तीखी आवाज़ ने उसे अपनी समस्या का समधान दे दिया और बिना परेशानी के उसने लोबो परिवार का अभिवादन किया.
बाद में जब वह उन्हें छोड़ने रैन्च के प्रवेशद्वार तक गई तो उसे भान हुआ उसने ऐसी रात पहले कभी नहीं देखी थी - ंखों को अन्धा कर देने वाली चमकीली सफ़ेद रात.
अब वह केक की आइसिंग बनाते हुए अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थी क्योंकि उसे भय था फिर से वैसा ही होगा.चीनी की सफ़ेदी देखकर उसे डर लगा. वह खुद को शक्तिहीन पा रही थी. उसे लग रहा था कि सफ़ेद रंग कभी भी उसकी चेतना पर छा जाएगा और बचपन की तमाम स्मृतियां उसे घसीट रही थीं. मई के महीने वर्जिन मैरी को अर्पित किए जाने वाले सफ़ेद्फूलों की स्मृतियां, सफ़ेद कपड़े पहने कई लड़कियों के साथ वह चर्च के भीतर गी थी जहां सफ़ेद फूलौर सफ़ेद मोमबत्तियां वेदी के ऊपर रखी हुई थीं. सफ़ेद चर्च के शीशों से छनकर सफ़ेद रोशनी भीतर फैली हुई थी. उस चर्च में हमेशा वह यह सोचकर प्रवेश किया करती थी कि एक दिन वह किसी पुरुष की बांहों में उस चर्च में आएगी. टिता ने न केवल इस विचार को रोकना था, बल्कि उन सारी स्मृतियों को भी जिनसे उसे इतना दर्द पहुंचा था. उसे अपनी बहन की शादी के केक की आइसिंग तैयार करनी थी. बेहद श्रम करते हुए उसने आइसिंग बनाना शुरू किया.
(जारी)
Monday, April 25, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - ७
(पिछली किस्त से जारी)
उसे बस दो ही अन्डॆ और फेंटने बाकी थे. बाक़ी सारी चीज़ें तैयार थीं - बस केक बनना था. बीस तरह के व्यंजन तैयार हो चुके थे और खाने से पहले वाले एपीटाइज़र भी. रसोई में तीता, नाचा और मामा एलेना ही थे. चेन्चा, गरत्रूदिस और रोसौरा वैडिंग ड्रेस में आख़िरी टांके लगाने में मशगूल थीं. चैन की सांस लेती हुई नाचा ने दो बचे हुए अण्डों में से एक को तोड़ने के लिए उठाया ही था इ तीता चिल्लाई -
"नहीं!"
तीता ने केक को फेंटना बन्द कर दिया और अण्डे को अपने हाथों में पकड़ लिया., आवाज़ बिल्कुल साफ़ थी, उसे अण्डे के भीतर से चूज़े की आवाज़ सुनाई पड़ रही थी. उसने अण्डे को अपने कानों के पास ले जा कर उस आवाज़ को और ज़ोर से सुना. मामा एलेना ने अपने काम रोक कर अधिकारपूर्ण आवाज़ में कहा -
"क्या हुआ? क्यों चिलाईं तु?"
"क्योंकि अण्डे के भीतर एक चूज़ा है. नाचा ने उसे नहीं सुना पर मैंने सुना."
चूज़ा? क्या पागल हो गई हो? ऐसा आज तक नहीं हुआ!"
दो लम्बे-लम्बे कदमों के साथ ही मामाएलेना तीता के बग़ल में आ खड़ी हुईं. उन्होंने तीता के हाथ से अण्डा लेकर फोड़ दिया. टिता ने जितना हो सकाअ था कस कर आंखें बन्द कर लीं.
"आंखें खोलो और देख लो अपना चूज़ा."
तीता ने धीमे-धीमे आंखें खोलीं. तीता ने देखा कि जिसे वह चूज़ा समझ रही थी वह ताज़ा अण्डा था.
"एक बात और ध्यान से सुनो, तीता. तुम मेरे धैर्य की परीक्षा ले रही हो. मैं तुम्हें ऐसे पागलॊं की तरह व्यवहार नहीं करने दूंगी. यह पहली और आख़िरी बार है. बरना जान लो तुम्हें पछताना पड़ेगा."
तीता की समझ में नहीं आया कि उस रात उसे क्या हो गया था. जो आवाज़ उसने सुनी थी वह थकान के कारण थी या उसे कोई भ्रम हुआ था. उस समय तीता को यही करना था कि वह केक को फेंटती रहती क्योंकि मामा एलेना के धैर्य की प्रतीक्षा लेने की उसे कोई इच्छा न थी.
जब आख़िरी दो अण्डे भी फेंट लिए जाएं, नीबू के छिलकों को भी फेंट लें जब मिश्रण काफ़ी गाढ़ा हो जाए, फेंटना बन्द कर पहले से फेंटा हुआ आटा भी उसमें मिला लें. लकड़ी की चम्मच से इस पूरे मिश्रण को एकसार बना लें. आख़िर में एक बरतन पर घी चुपड़क, थोड़ा सा आटा फैला कर, उसमें सारा मोश्रण डालकर तीस मिनट तक बेक करें.
तीन दिन तक लगातार बीस तरह के व्यंजन पका चुकने के बाद नाचा थक चुकी थी. केक को ओवन में डालने का इन्तज़ार उससे नहीं हो रहा था ताकि उसके बाद वह आराम कर सके. आज तीता भी हमेशा जैसी सहायक नहीं थी. ऐसा नहीं था कि उसने कोई शिकायत की थी - पर जैसे ही मामा एलेना रसोई से अपने कमरे की तरफ़ गईं - तीता ने एक लम्बी सांस छोड़ी. नाचा चम्मच अपने हाथ से नीचे रखा और तीता को गले से लिपटा लिया -
"अब हम रसोई में अकेले हैं. चलो मेरी बच्ची, अब जितना मर्ज़ी चाहो रो लो क्योंकि कल मैं यह नहीं चाहूंगी कि कोई तुम्हें रोता हुआ देखे. कम से कम रोसौरा तो हर्गिज़ नहीं."
नाचा ने तीता को काम करने से रोक दिया क्योंकि उसे लगा तीता कभी भी अचेत हो सकती है. अलबत्ता तीता की मनःस्थितिके लिए उसके पास शब्द नहीं थे लेकिन नाचा जानती थी तीता से अब काम नहीं हो पाएगा. असल में अब उस से भी यह सब नहीं हो सकता था. नाचा को रोसौरा के खाने की आदतें पसन्द नहीं थीं - बचपन से ही वह अपनी नापसन्द चीज़ों को मेज़ पर ही छोड़ देती थी या खाना तेकीला को खिला देती थी. तेकीला, रैन्च के कुत्ते, पुल्के का पिता था. वहीं तीता कुछ भी खा लेती थी. तीता को केवल कम उबले अण्डे नहीं भाते थे जिन्हें मामा एलेना उसे जबरन खिलाया करती थीं. तीता उन सारी चीज़ों को खा लिया करती थी रोसौरा जिन्हें देखकर भयभीत हो जाया करती. रोसौरा और नाचा कभी नज़दीक नहीं रहे थे. दर असल नाचा को रोसौरा नापसन्द थी और दो बहनों की प्रतिद्वन्द्विता अब इस मुकाम पर खत्म हो रही थी जब रोसौरा की शादी उस व्यक्ति से हो रही थी जिसे तीता प्यार करती थी. रोसौरा निश्चित तो नहीं थी पर उसे लगता था कि तीता के लिए पेद्रो पा प्यार कभी ख़त्म नहीं होगा. नाचा हमेशा तीता के पक्ष में होती थी और तीता का दर्द कम करने के लिए कुछ भी करने को सदैव तत्पर. अपने एप्रन से उसने उन आंसुओं को पोंछा जो तीता के गाल पर लुढ़क रहे थे और बोली -
"अब , मेरी बच्ची, हमें केक बनाना चाहिए."
इस काम में थोड़ा अधिक देर लग गई क्योंकि मिश्रण गाढ़ा नहीं हो पा रहा था. यह इस वजह से था कि तीता का रोना बन्द नहीं हुआ था.
सो, तीता और नाचा, एक दूसरे से लिपटे हुए तब तक रोते रहे जब तक कि सारे आंसू खत्म नहीं हो गए. उसके बाद तीता बिना आंसुओं के रोती रही, जो, कहते हैं ज़्यादा दर्द करता है. लेकिन कम से कम अब केक का मिश्रण गीला नहीं हो रहा था. अब वे अगली प्रक्रिया शुरू कर सकते थे - यानी फ़िलिंग तैयर करना.
(जारी)
Sunday, April 24, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - 6
(पिछली किस्त से जारी)
अध्याय २ - फ़रवरी
चाबेला वैडिंग केक
आवश्यक सामग्री -
१७५ ग्राम चीनी का बुरादा
३०० ग्राम तीन बार फेंटा हुआ केक बनाने का आटा
१७ अण्डे’
एक नीबू के कद्दूकस किए हुए छिलके
बनाने की विधि -
पांच अण्डों की ज़र्दी, चार पूरे अण्डे और चीनी के बुरादे को एक बड़ी कटोरी में रखकर फेंटें ताकि मिश्रण गाढ़ा हो जाए. उसके बाद दो अण्डे और डालकर फेंटें. इसी प्रक्रिया को तब तक जारी रखें जब तक सारे अण्डों का इस्तेमाल न हो जाए. पेद्रो और रोसौरा की शादी का केक बनाने के लिए तीता और नाचा ने आवश्यक सामग्री को दस से गुणा किया क्योंकि यह केक अठार्ह लोगों के स्थान पर एक सौ अस्सी लोगों के लिए बनाया जाना था. इसलिए उन्हें एक सौ सत्तर अण्डों की आवश्यकता थी - यानी एक ही दिन में उनको इतनी संख्या में अच्छे अण्डे चाहिए थे.
इसके लिए उन्होंने कई हफ़्तों तक सबसे अच्छी मुर्गियों द्वारा दिए गए अण्डों को सम्हाल कर रखा. अण्डों को सम्हालने की यह विधि रैन्च में लम्बे समय से इस्तेमाल की जाती रही थी ताकी सर्दियों में भी पौष्टिक भोजन मिलता रहे. अण्डों को सम्हालने का सर्वश्रेष्ठ समय होता है - अगस्त या सितम्बर. अण्डे बिल्कुल ताज़े होने चाहिए. नाचा उन्हीं अण्डों को लेती थी जो उसी दिन दिए गए होते थे.अण्डों को एक पीपे में सूखे हुए चारे के साथ रखा जाता है. थोड़ा ठण्डा होने के बाद उन्हें ढंक दिया जाता है. इसके बाद महीनों तक वे ताज़े रहेंगे. अगर आप चाहते हैं कि अण्डे साल भर से ज़्यादा समय तक ताज़े रहें तो मिट्टी के बरतन में उन्हें रखकर दस प्रतिशत चूने के घोल से ढंक दें. कसकर बन्द करने के बाद उन्हें शराब बनाने की कोठरी में रख दें. तीता और नाचा ने पहली वाली प्रक्रिया का इस्तेमाल करना उचित समझा क्योंकि उन्हें अण्डों को काफ़ी समय तक नहीं सम्हालना था. इस समय उन्होंने का पीपा अपने बीच रसोई की मेज़ के नीचे रखा हुआ था और वे केक बनाने में व्यस्त थीं.
सौ अण्डे फेंट चुकने के बाद तीता का मन थोड़ा ख़राब हो गया क्योंकि इस काम में काफ़ी मशक्कत लगती है. १७० का लक्ष्य तीता को असम्भव लगने लगा.
नाचा अण्डों को फोड़कर मिश्रण में डाल रही थी जबकि तीता उन्हें फेंट रही थी. जब जब एक अण्डा फोड़ा जाता तीता की त्वचा में कंपन सा उठता. अण्डों की सफ़ेदी उसे उन मुर्गों के अण्डकोशों जैसी दिखाई पड़ रही थी जिन्हें पिछले महीने बधिया किया गया था. ऐसे मुर्गों को खूब खिला पिला कर मोटा किया जाता है. परिवार में यह निर्णय लिया गया था कि पेद्रो और रोसौरा के विवाह पर इन मुर्गों को परोसा जाएगा ताकि हर कोई भोजन को सराहे.
जैसे ही बारत जनवरी की तारीख विवाह के लिए तय की गई. तुरन्त दो सौ मुर्गे खरीदे गए और उन्हें परोसे जाने के लिए तैयार किया जाने लगा.
मुर्गों को बधिया करने की ज़िम्मेदारी तीता और नाचा को सौंपी गई. नाचा को उसके अनुभव के कारण और तीता को उसकी बहन रोसौरा की सगाई के समय सिरदर्द का बहाना बनाने के कारण.
"मैं इसे कतई बर्दाश्त नहीं करूंगी कि कोई मेरी आज्ञा न माने" मामा एलेना ने उससे कहा था. "और न मैं तुम्हें इसकी इजाज़त दूंगी कि तुम अपनी बहन की शादी बर्बाद करो. अब से शादी की सारी तैयारियों का ज़िम्मा तुम्हारा है और याद रहे मैं तुम्हारी आंखों में न तो एक आंसू देखूं और न तुम्हारा लटका हुआ मुंह. आई समझ में?"
जब वह पहले मुर्गे को बधिया करने जा रही थी यह चेतावनी तीता के मन में थी. इस कार्य के लिए मुर्गे के अण्डकोश के बाहर एक चीरा लगाया जाता हैऔर उंगलियांअण्डकोश के भीतर डालकर उन्हें बाहर खींच लिया जाता है, बाद में घाव को सिलकर बाहर से सूअर या मुर्गे कॊ चरबी का लेप लगा देते हैं. जब तीता ने अपनी उंगलियां अण्डकोष के भीतर डालीं तो उसे मूर्छा सी आने लगी. वह पसीने से भीग सी गई और उसका पेट आकाश में पलंग की तरह लहराने लगा. मामा एलेना ने उस पर तीखी निगाह डालकर कहा:
"क्या हुआ? क्यों कांप रही हो तुम? क्या फिर कोई नया पचड़ा खड़ा करने वाली हो तुम?" तीता ने अपनी आंख उठाकर उन्हें देखा. वह चीखना चाहती थी, हां उसे परेशानी हो रही है. अगर उन्होंने किसी को बधिया करना ही था तो उन्होंन्र गलत चीज़ चुन ली थी. उन्होंने उसे बधिया करना था. कम से कम उनका यह कदम इसलिए तो उचित होता ताकि वह शादी न कर पाएऔर रोसौरा को उस आदमी से शादी करने दे जिस से वह प्यार करती थी. मामा एलेना ने उसकी आंखों को पढ़ लिया और गुस्से मं पगलाकर उन्होंने तीता को एक करारा झापड़ रसीद किया. तीता लुढ़क कर धूल में मुर्गे के पास जा गिरी, जो इस गड़बड़ में मर चुका था.
इन्हीं विवारों में खोई तीता पागलों की तरह केक फेंट रही थी जैसे वह अपनी शहादत को पूरा करना चाह रही हो - हमेशा के लिए!
(जारी)
अध्याय २ - फ़रवरी
चाबेला वैडिंग केक
आवश्यक सामग्री -
१७५ ग्राम चीनी का बुरादा
३०० ग्राम तीन बार फेंटा हुआ केक बनाने का आटा
१७ अण्डे’
एक नीबू के कद्दूकस किए हुए छिलके
बनाने की विधि -
पांच अण्डों की ज़र्दी, चार पूरे अण्डे और चीनी के बुरादे को एक बड़ी कटोरी में रखकर फेंटें ताकि मिश्रण गाढ़ा हो जाए. उसके बाद दो अण्डे और डालकर फेंटें. इसी प्रक्रिया को तब तक जारी रखें जब तक सारे अण्डों का इस्तेमाल न हो जाए. पेद्रो और रोसौरा की शादी का केक बनाने के लिए तीता और नाचा ने आवश्यक सामग्री को दस से गुणा किया क्योंकि यह केक अठार्ह लोगों के स्थान पर एक सौ अस्सी लोगों के लिए बनाया जाना था. इसलिए उन्हें एक सौ सत्तर अण्डों की आवश्यकता थी - यानी एक ही दिन में उनको इतनी संख्या में अच्छे अण्डे चाहिए थे.
इसके लिए उन्होंने कई हफ़्तों तक सबसे अच्छी मुर्गियों द्वारा दिए गए अण्डों को सम्हाल कर रखा. अण्डों को सम्हालने की यह विधि रैन्च में लम्बे समय से इस्तेमाल की जाती रही थी ताकी सर्दियों में भी पौष्टिक भोजन मिलता रहे. अण्डों को सम्हालने का सर्वश्रेष्ठ समय होता है - अगस्त या सितम्बर. अण्डे बिल्कुल ताज़े होने चाहिए. नाचा उन्हीं अण्डों को लेती थी जो उसी दिन दिए गए होते थे.अण्डों को एक पीपे में सूखे हुए चारे के साथ रखा जाता है. थोड़ा ठण्डा होने के बाद उन्हें ढंक दिया जाता है. इसके बाद महीनों तक वे ताज़े रहेंगे. अगर आप चाहते हैं कि अण्डे साल भर से ज़्यादा समय तक ताज़े रहें तो मिट्टी के बरतन में उन्हें रखकर दस प्रतिशत चूने के घोल से ढंक दें. कसकर बन्द करने के बाद उन्हें शराब बनाने की कोठरी में रख दें. तीता और नाचा ने पहली वाली प्रक्रिया का इस्तेमाल करना उचित समझा क्योंकि उन्हें अण्डों को काफ़ी समय तक नहीं सम्हालना था. इस समय उन्होंने का पीपा अपने बीच रसोई की मेज़ के नीचे रखा हुआ था और वे केक बनाने में व्यस्त थीं.
सौ अण्डे फेंट चुकने के बाद तीता का मन थोड़ा ख़राब हो गया क्योंकि इस काम में काफ़ी मशक्कत लगती है. १७० का लक्ष्य तीता को असम्भव लगने लगा.
नाचा अण्डों को फोड़कर मिश्रण में डाल रही थी जबकि तीता उन्हें फेंट रही थी. जब जब एक अण्डा फोड़ा जाता तीता की त्वचा में कंपन सा उठता. अण्डों की सफ़ेदी उसे उन मुर्गों के अण्डकोशों जैसी दिखाई पड़ रही थी जिन्हें पिछले महीने बधिया किया गया था. ऐसे मुर्गों को खूब खिला पिला कर मोटा किया जाता है. परिवार में यह निर्णय लिया गया था कि पेद्रो और रोसौरा के विवाह पर इन मुर्गों को परोसा जाएगा ताकि हर कोई भोजन को सराहे.
जैसे ही बारत जनवरी की तारीख विवाह के लिए तय की गई. तुरन्त दो सौ मुर्गे खरीदे गए और उन्हें परोसे जाने के लिए तैयार किया जाने लगा.
मुर्गों को बधिया करने की ज़िम्मेदारी तीता और नाचा को सौंपी गई. नाचा को उसके अनुभव के कारण और तीता को उसकी बहन रोसौरा की सगाई के समय सिरदर्द का बहाना बनाने के कारण.
"मैं इसे कतई बर्दाश्त नहीं करूंगी कि कोई मेरी आज्ञा न माने" मामा एलेना ने उससे कहा था. "और न मैं तुम्हें इसकी इजाज़त दूंगी कि तुम अपनी बहन की शादी बर्बाद करो. अब से शादी की सारी तैयारियों का ज़िम्मा तुम्हारा है और याद रहे मैं तुम्हारी आंखों में न तो एक आंसू देखूं और न तुम्हारा लटका हुआ मुंह. आई समझ में?"
जब वह पहले मुर्गे को बधिया करने जा रही थी यह चेतावनी तीता के मन में थी. इस कार्य के लिए मुर्गे के अण्डकोश के बाहर एक चीरा लगाया जाता हैऔर उंगलियांअण्डकोश के भीतर डालकर उन्हें बाहर खींच लिया जाता है, बाद में घाव को सिलकर बाहर से सूअर या मुर्गे कॊ चरबी का लेप लगा देते हैं. जब तीता ने अपनी उंगलियां अण्डकोष के भीतर डालीं तो उसे मूर्छा सी आने लगी. वह पसीने से भीग सी गई और उसका पेट आकाश में पलंग की तरह लहराने लगा. मामा एलेना ने उस पर तीखी निगाह डालकर कहा:
"क्या हुआ? क्यों कांप रही हो तुम? क्या फिर कोई नया पचड़ा खड़ा करने वाली हो तुम?" तीता ने अपनी आंख उठाकर उन्हें देखा. वह चीखना चाहती थी, हां उसे परेशानी हो रही है. अगर उन्होंने किसी को बधिया करना ही था तो उन्होंन्र गलत चीज़ चुन ली थी. उन्होंने उसे बधिया करना था. कम से कम उनका यह कदम इसलिए तो उचित होता ताकि वह शादी न कर पाएऔर रोसौरा को उस आदमी से शादी करने दे जिस से वह प्यार करती थी. मामा एलेना ने उसकी आंखों को पढ़ लिया और गुस्से मं पगलाकर उन्होंने तीता को एक करारा झापड़ रसीद किया. तीता लुढ़क कर धूल में मुर्गे के पास जा गिरी, जो इस गड़बड़ में मर चुका था.
इन्हीं विवारों में खोई तीता पागलों की तरह केक फेंट रही थी जैसे वह अपनी शहादत को पूरा करना चाह रही हो - हमेशा के लिए!
(जारी)
जैसे चॉकलेट के लिए पानी -५
(पिछली किस्त से जारी)
यह हद थी. पाकीता को लगता कि वह नशे में है. वह नहीं चाहती थी कि पाकीता के दिल में ज़रा भी सन्देह रह जाए वरना वह उसकी मां से कह देती. मां के भय से कुछ पल को तीता पेद्रो को भूल गई. वह पूरी शिद्दत से पाकीता को यह यकीन दिलाने लगी कि वह बिल्कुल ठीक से सोच पा रही है और चैतन्य है. उसने उस से बातचीत की और यहां तक कि नोयो शराब बनाने की विधि भी बतलाई. इस शराब को बनाने के लिए चार औंस आड़ू और आधा पाउन्ड खुबानी को चौबीस घन्टे पानी में भिगोना होता हैताकि उनके छिलके उतारे जा सकें, फिर उन्हें छीक और कुचल कर पन्द्रह दिन तक गरम पानी में भिगाया जाना चाहिए - इसके बाद शराब डिस्टिल की जाती है. जब पानी में ढाई पाउन्ड चीनी घुल जाए उसमें सन्तरे के फूलों का चार औंस पानी मिलाकर हिलाया जाना चाहिए, ताकि पाकीता के मन में ज़रा भी सन्देह न रह जाए, तीता ने जैसे खुद से बातचीत करते हुए उसे बताया कि पानी के पात्रों में २.०१६ आता है न अधिक न कम.
सो जब मामा एलेना पाकीता के पास्पूछने आईं कि उन्हें ठीक लरहा है या नहीं, उन्होंने बड़े उत्साह से जवाब दिया -
"हां हां ! सब ठीक है - आपकी बेटियां लाजवाब हैं - मुझे बातचीत में आनन्द आ रहा है.
मामा एलेना ने तीता को रसोई से मेहमानों के लिए कुछ लाने को भेज दिया. उसी समय "इत्तेफ़ाकन" पेद्रो भी वहां से गुज़रा और उसने तीता की मदद करने की पेशकश की. तीता बिना कुछ कहे रसोई की तरफ़ भाग गई. पेद्रो की उपस्थिति उसके लिए बेहद असुविधाजनक थी. वह उसके पीछे पीछे रओई में आया तो तीता ने उसके हाथों में स्नैक्स की एक ट्रे थमा दी जो रसोई की मेज़ पर उठाए जाने की प्रतीक्षा में रखी हुई थी.
उस क्षण को वह कभी नहीं भूल पाएगी जब वे दोनों एक साथ ही ट्रे उठाने के लिए झुके और उनके हाथ एक दूसरे से छू गए.
उस समय पेद्रो ने अपने प्रेम का इज़हार किया.
"सेन्योरीता तीता, इस अवसर का लाभ उठाते हुए जब तुम्हारे साथ मैं अकेला हूं, मैं कहना चाहता हूं कि मुझे तुमसे प्यार हो गया है. मैं जानता हूं यह सब बहुत अचानक कह रहा हूं पर तुम अकेली मिलती ही कहां हो, सो मैंने फ़ैसला किया है आज रात तुम्हें बता दूंगा. मैं सिर्फ़ इतना पूछना चाहता हूं कि क्या मुझे तुम्हारा प्यार मिल पाएगा?"
"मैं क्या कहूं... मुझे सोचने के लिए थोड़ा समय चाहिए"
"नहीं ऐसा नहीं हो सकता. मुझे अभी उत्तर चाहिए, प्यार के बारे में सोचा थोड़े ही जाता है, या वह महसूस होता है या नहीं होता. मैं बहुत कम बातें करता हूं लेकिन मे्रे शब्द मेरी प्रतिज्ञा हैं. मैं कसम खाता हूं मैं तुमसे हमेशा प्यार करता रहूंगा और तुम? क्या तुम भी मेरे बारे में ऐसा सोचती हो?
"हां"
हां, एक हज़ार बार हां. उस रात के बाद वह हमेशा उससे प्रेम करती रही. यह अशालीन होता है कि अपनी बहन के होने वाले पति से प्यार किया जाए. अब किसी तरह तीता को अपने दिमाग से उस को दूर करना था ताकि वह सो सके. उसने दूध का गिलास और वह क्रिसमस रोल खाना शुरू किया जो नाचा ने उसके लिए छोड़ रखा था. यह उपाय पहले भी कारीगर साबित हो चुका था. नाचा जानती थी कि तीता का कोई भी ऐसा दर्द नहीं जो क्रिसमस रोल खाने से दूर न हो जाए. मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ.उसके पेट में जो ख़ालीपन गुड़गुड़ा रहा था उससे कोई आराम न था. उसे लगा कि पेट का ख़ालीपन भूख के कारण नहीं था, बल्कि वह दुःख की एक ठण्डी अनुभूति था. उस भीषण ठण्ड से वह राहत पाना चाहती थी. उसने पहले ऊनी कपड़े पहने फिर एक लबादा डाल लिया. ठण्ड अब भी लग रही थी. उसने ऊनी चप्पलें पहनीं और दो शॉल और ओढ़ लिए. आख़िरकार वह अपने सिलाई वाले बक्से के पास गई. उसने वह चादर निकाली जिसे उसने उस दिन बनाना शुरू किया थाजब पेद्रो ने उस से पहली बार शादी की बात की थी. क्रोशिए की बनी ऐसी चादर को पूरा होने में करीब एक साल लगता है. पेद्रो और तीता ने अपनी शादी से पहले इतने ही समय रुकने की योजना बनाई थी. उसने धागे का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया ताकि वह बर्बाद न हो जाए सो उसने चादर पर काम करना शुरू किया - सुबह होने तक वह रोती रही, चादर पर काम करती रही. आखिर उसने उसे भी अपने ऊपर डाल लिया. इस से कोई फ़ायदा नहीं हुआ. न उस रात को और कई रातों को. जब तक वह जीवित रही तीता उस ठण्ड से ख़ुद को आज़ाद नहीं कर सकी.
(पहला अध्याय समाप्त)
(अगले माह का व्यंजन - चाबेला वैडिंग केक)
Saturday, April 23, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - 4
(पिछली किस्त से जारी)
सबसे अच्छा है घर में बने हुए रोल्स का इस्तेमाल किया जाए. कड़े रोल्स बेकरी में आसानी से मिल जात्र हैं. लेकिन वे छोटे होने चाहिए. इस व्यंजन को बनाने के लिए बड़े वाले काम में नहीं लाए जा सकते. रोल्स के भरने के बाद उन्हें दस मिनट तक बेक करें और गरम गरम परोसें. बेहतर परिणामों के लिए अच्छा यह होगा कि रोल्स को कपड़े में लपेट कर रात भर छोड़ दें ताकि सॉसेजेज़ की चिकनाई सोखी जा सके.
जब तीता रोल्स को अगले दिन के लिए लपेट चुकी थी, मामा एलेना ने भीतर आकर उन्हें सूचित किया कि उन्होंने पेद्रो के विवाह की बात मान ली है - रोसौरा के साथ.
चेन्चा की बताई बात के निश्चित हो जाने पर तीता को लगा उसकी देह एक भीषण ठण्ड से भर गई है. एक तीखे विस्फोट से वह इतनी ठण्डी और शुष्क पड़ गई कि उसके गाल जलने लगे और लाल हो गए - बग़ल में रखे सेब की तरह. वह ठण्ड बहुत देर तक रही और तीता को ज़रा भी आराम नहीं पहुंचा. यहां तक कि जब नाचा ने पास्कुआल मार्क्विज़ और उनके बेटे को र्तैन्च के गेट तक छोड़ते वक्त सुनी उनकी बातें भी तीता को बताईं. नाचा बहुत खामोशी से उनके पीछे-पीछे गई थीताकि बाप-बेटे की बातें सुन पाए. दोन पास्कुआल और पेद्रो धीमे संयत और क्रोधित स्वरों में बोल रहे थे.
"तुमने ऐसा क्यों किया पेद्रो? यह मख़ौल जैसा लगेगा-तुम्हारा रोसौरा से ब्याह करना. उस अमर प्रेम का क्या हुआ जो तुम्हें तीता से था. जिसकी तुमने सौगन्ध खाई थी? तुम्हारा वादा क्या हुआ?"
"वो तो मैं निभाऊंगा ही. अगर आपको बताया जाए कि जिस लड़की से आप प्यार करते हैं उस से शादी असम्भव है तो उसके पास बने रहने का सबसे सही रास्ता यही है कि उसकी बहन से शादी कर ले आदमी. क्या आपने भी यही नहीं किया होता?
इसका उत्तर नाचा नहीं सुन पाई क्योंकि उसी वक्त रैन्च का कुत्ता पूल्के एक खरगोश को बिल्ली समझ कर उसके पीछे भौंकता हुआ वहां से गुज़रा.
"तो तुम बिना प्रेम के शादी करने का फ़ैसला ले चुके हो?"
"नहीं पापा, मैं तीता के प्रति एक महान प्रेम के कारण यह शादी करूंगा, जो कभी समाप्त नहीं होगा."
उनके पैरों के नीचे सूखी पत्तियों की कड़कड़ाहट के कारण उनकी आवाज़ें सुन पाना काफ़ी मुश्किल होता गया. कितनी विचित्र बात है - नाचा जिसे कम सुनाई देता था, वह कहे कि उसनेइस वार्तालाप को सुना था. जो भी हो, तीता ने नाचा को धन्यवाद दिया- लेकिन पेद्रो के प्रति उसके दिल में बर्फ़ीली भावनाएं नहीं बदलीं. यह कहा जाता है कि बहरे लोग सुन नहीं पाते लेकि समझ लेते हैं. शायद नाचा ने वह सुना था जिसे कहने में औरों को भय लगता था. उस रात तीता सो नहीं सकी. उसे जो महसूस हो रहा था उसे वह शब्दों में नहीं ढाल पा रही थी. कितना दुर्भाग्यपूर्ण है उस वक्त तक ब्रह्माण्ड में "ब्लैक होल" की खोज नहीं हो पाई थी, शायद तब वह अपने सीने के बीचोबीच उस ब्लैक होल को महसूस कर पाती जिसमें से अनन्त ठण्ड बह रही थी.
जब भी वह आंखें बन्द करती, उसके दिमाग में पिछले क्रिसमस का दृश्य घूम जाता. पहली बार पेद्रो और उसके परिवार को आमन्त्रित किया गया था. वह दृश्य्य और भी साफ़ होता गया, उतनी ही तीखी होती गई उसके भीतर की ठण्ड. उस शाम के बाद इतना समय गुज़र जाने के बावजूद उसे सब कुछ अच्छी तरह याद था - आवाज़ें, ख़ुशबूएं, कैसे उसकी पोशाक ताज़ा पॉलिश किएहुए फ़र्श पर घिसट रही थी, और पेद्रो की निगाहें - "वे निगाहें!" वह मिठाइयों की ट्रे लिए मेज़ की तरफ़ बढ़ रही थी और उसने पेद्रो की निगाहों को महसूस किया जो उसकी त्वचा को जला रही थीं. उसने सिर घुमाया तो उसकी निगाहें पेद्रो से जा टकराईं. उस समय उसे महसूस हुआ कि गुंदे हुए आटे को गरम तेल में छोड़े जाते वक्त कैसा महसूस होता होगा. जितनी गर्मी उसके शरीर में प्रवेश कर रही थी उसे भय हुआ उसके भीतर से बुलबुले उठने शुरू हो जाएंगे - उसके चेहरे, पेट, हृअदय, छातियों से - चूरन की तरह. उसकी निगाहोंका सामना करने में ख़ुद को असमर्थ पा कर वह कमरे के दूसरी तरफ़ चली गई जहां गरत्रूदिस पियानो पर "ओहोस दे होवेन्तूद" - वाल्ज़ बजा रही थी. उसने वहीं बीच की एक छोटी मेज़ पर अपनी ट्रे रखी और बिना यह जाने वह क्या कर रही हैसामने रखी शराब का एक गिलास उठाकर अपनी पड़ोसन पाकीता लोबो के बगल में जा बैठी. लेकिन पेद्रो से इतनी दूरी भी काफ़ी नहीं थी. उसे अपना रक्त नसों को फाड़ता सा लग रहा था. उसके चेहरे पर लाली छाई थी. तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी निगाहें किसी एक चीज़ पर टिक नहीं पा रही थीं. पाकीता ने उसे देखा तो बहुत चिन्तित होते हुए कहा-
"काफ़ी तेज़ है न ये शराब?"
"माफ़ कीजियेगा, आपने कुछ कहा?"
"तुम थोड़ा परेशाअन दिख रही हो तीता. सब ठीक तो है न?"
"जी हां शुक्रिया."
"तुम इतनी बड़ी तो हो ही चुकी हो कि खास मौकों पर एक ड्रिंक तो ले ही सको लेकिन शैतान लड़की. क्या तुम्हारी मां ने इसकी इजाज़त दी है? मैं देख रही हूं तुम उत्तेजित दिखती हो - और कांप भी रही हो - इसलिए बेहतर होगा और न पियो - अपना तमाशा बनाना तो तुम नहीं चाहोगी"
(जारी)
Friday, April 22, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - ३
(पिछली किस्त से जारी)
तीता जानती थी मामा एलेना के घर में बह्स करना मुमकिन न था, परन्तु अपने जीवन में पहली बार वह मां के आदेशों का विरोध काना चाहती थी.
"लेकिन मेरे विचार से ..."
"तुम्हारा कोई विचार नहीं हो सकता, और इस बारे में मैं और कुछ नहीं सुनना चाहती. पीढ़ियों से इस परम्परा का हमारे परिवार में किसी ने विरोध नहीं किया है और न ही मेरी कोई बेटी ऐसा करेगी ..."
तीता ने अपना सिर झुका लिया और जिस तेज़ी से उसे अपना भाग्य मालूम हुआ था उसी तेज़ी से उसके आंसू मेज़ पर गिरने शुरू हो गए. उस दिन के बाद से तीता और मेज़ दोनों को मालूम हो गया कि तीता को अपनी मां के पागलपन भरे फ़ैसले के सामने झुकने के विरोध में कहीं कोई आवाज़ नहीं करनी होगी. मेज़ पर तीता के कड़वे आंसु गिरते रहे जो उसने पहली बार अपने जन्म के वक्त गिराए थे.
फिर भी तीता ने समर्पण नहीं किया. उसके भीतर कई शंकाएं उमड़ने लगीं. वह जानना चाहती थी कि परिवार में यह परम्परा किसने शुरू की थी. कितना अच्छा होता अगर उस अति-बुद्धिमान व्यक्ति को इस दोषरहित योजना का एक छोटा सा दोष बता पाती. यदि तीता की शादी नहीं होगी, बच्चे नहीं होंगे तो बुढ़ापे में उसकी देखभाल कौन करेगा? कोई समाधान? या यह उम्मीद की जाती थी कि अपनी मांओं की देखभाल करने वाली बेटियां मां-बाप के मरने के बाद ख़ुद भी ज़्यादा समय जीवित नहीं रहेंगी? और उन औरतों का क्या होगा जो शादी के बाद भी निस्संतान रह जाएंगी? वह ये भी जानना चाहती थी कि किस अध्ययन के आधार पर यह भार सबसे छोटी बेटी पर लादा गया, सबसे बड़ी पर क्यों नहीं. क्या कभी बेटों के ख्यालों का ध्यान रखा गया? अगर उसे शादी की इजाज़त नहीं थी तो क्या वह प्रेम कर सकती थी? या वह भी नहीं?
तीता को अच्छी तरह मालूम था उसके सारे प्रश्न बिना उत्तरों के सदा के लिए दफ़्न कर दिए जाएंगे. यह दे ला गार्ज़ा परिवार की परम्परा थी - बिना कुछ कहे-सुने तुरन्त आदेश मानना. तीता की तरफ़ कोई ध्यान न देती हुई मामा एलेना रसोई से बहुत गुस्से में उठकर चल दीं, और हफ़्ते भर उस से एक शब्द भी नहीं बोलीं.
उनके बीच वार्तालाप तब शुरू हुआ जब मामा एलेना घर की स्त्रियों को कपड़े सीता हुआ देख रही थीं और उन्होंने पाया कि जो कुछ तीता सी रही थी वह सबसे अच्छा तो था पर उसमें सीने से पहले टांके नहीं लगाए गए थे.
"बहुत अच्छा" वे बोलीं "तुम्हारी सिलाई में कोई दोष नहीं - मगर तुमने पहले टांके नहीं लगाए शायद."
"नहीं" तीता बोली - बातचीत दुबारा शुरू होने से वह चकित थी.
"तब जाओ, इसे उधेड़कर टांके लगाओ, दुबारा सियो और मुझे दिखाओ और याद रखो आलसी और लोभी आदमी को एक ही रास्ता दो बार तय करना पड़ता है."
"लेकिन अगर कोई गलती करे तब, और अभी अभी आपने कहा था कि मेरी सिलाई ..."
"तुम फिर से बगावत पर उतारू हो? यही काफ़ी है कि तुमने सिलाई के नियमों को तोड़ने का साहस किया..."
"माफ़ करना मामी, फिर ऐसा नहीं होगा."
इस से तीता मामा एलेना का गुस्सा शान्त करने में कामयाब हुई. इस बार वह बेहद सतर्क थी - उसने बिल्कुल सही स्वर में उन्हें मामी कहकर सम्बोधित किया था. मामा एलेना को लगता था कि मामा शब्द में थोड़ा सा अनाअर का भाव होता है इसलिए बचपन से ही उन्होंने अपनी बेटियों को उन्हें मामी कहकर पुकारने की हिदायत दी हुई थी. तीता ही इसका विरोध करती थी और वही इस शब्द समुचित आदर के साथ नहीं कहती थी - इसके लिए वह कई थप्पड़ खा चुकी थी लेकिन इस बार उसका सम्बोधन बिल्कुल सही था. मामा एलेना को लगा अन्ततः उन्होंने अपनी सबसे छोटी बेटी पर काबू पा लिया है.
दुर्भाग्य से उनकी उम्मीदें झूठी निकलीं क्योंकि अगले दिन पेद्रो मार्क्विज़ अपने सम्मानित पिता के साथ उनके दरवाज़े पर था. वे तीता का हाथ मांगने आए थे. उनके आने पर घर में कोहराम मच गया क्योंकि इसकी किसी को उम्मीद न थी. कुछ ही दिन पहले तीता ने नाचा के भाई के माध्यम से पेद्रो को यह सन्देशा भिजवाया था कि वह इस रिश्ते का ख्याल छोड़ दे. नाचा के भाई ने सौगंध खाकर कहा था कि उसने सन्देश पहुंचा दिया था लेकिन इस समय वे घर के अन्दर थे. मामा एलेना ने उनका स्वागत किया. बहुत ही शिष्टता के साथ उन्होंने समझाया क्यों तीता का विवाह सम्भव नहीं.
"लेकिन आप वाकई पेद्रो की शादी करना चाहते हैं तो मेरी बेटी रोसौरा उपलब्ध है. वह तीता से दो बरस बड़ी है और शादी के लिए तैयार भी ..."
इस पर चेन्ची जो दोन पास्कुआल और उनके पुत्र के लिए कॉफ़ी और बिस्कुट लेकर आ रही थी ट्रे समेत करीब-करीब मामा एलेना पर गिर पड़ी. माफ़ी मांगकर वह सीधा रसोई की तरफ़ भागी जहां तीता, रोसौरा और गरत्रूदिस बेसब्री से उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे. वह सीधी कमरे में घुसी तो उन सब ने सारे काम रोक दिए ताकि चेन्चा का हर शब्द सुन सकें.
वे रसोई में क्रिसमस रोल्स बना रही थीं. जैसा कि नाम से जाहिर है ये रोल्स क्रिसमस के आसपास बनाए जाते हैं, लेकिन आज वे तीता के जन्मदिन के मौके पर बन रहे थे. वह सोलह की हो जाएगी और इस मौके को वह अपने सबसे प्रिय व्यंजन के साथ मनाना चाहती थी.
"ये भी कोई बात है? तुम्हारी मां शादी के बारे में ऐसे बात करती हैं जैसे वो एन्चिलादा की प्लेट तैयार करने के बारे में हो. और इस से भी बुरा यह कि वे बिल्कुल अलग अलग होते हैं.. कोई ऐसे एन्चिलादा और ताकोस की अदलाबदली कैसे कर सकता है?"
चेन्चा ने आंखों देखा हाल सुनाना इसी प्रकार जारी रखा - अपनी शैली में. तीता को पता था चेन्चा कई बार बढ़ाचढ़ा कर बोलती थी, सो उसने अपने दिल को काबू में रखा. उसने जो कुछ सुना था उस पर यकीन नहीं किया. खुद को बिल्कुल शान्त दिखाते हुए उसने रोल्स काटना जारी रखा ताकि नाचा और उसकी बहनें उन्हें भर सकें.
(जारी)
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - २
(पिछली किस्त से जारी)
कभी कभी वह अकारण भी रोया करती थी जैसे नाचा जब प्याज़ काटती थी. लेकिन चूंकि दोनों ही इसका कारण जानते थे, वे ज़रा भी ध्यान नहीं दिया करते थे. उसके लिए आंसू मनोरंजन का साधन हो गए थे. इसी कारण बचपन में तीता ख़ुशी और दुःख के आंसुओं में फ़र्क़ नहीं कर पाती थी. तीता का हंसना भी रोने जैसा होता था.
तीता के लिए जीवन के आनन्द भोजन के आनन्द से जुड़े हुए थे. बाहरी दुनिया को समझना ऐसे व्यक्ति के लिए आसान नहीं था जीवन के बारे में जिसका ज्ञान रसोईघर की जानकारी पर आधारित हो. रसोईघर के दरवाज़े के उस पार की दुनिया एक बहुत बड़ा विस्तार थी. वहीं दरवाज़े के इस तरफ़ - रसोई, पिछवाड़े का बरामदा और मसालों का बग़ीचा - सब कुछ तीता का था - उसका साम्राज्य था वह.
उसकी बहनें उस से बिल्कुल उलटी थीं - उन के लिए तीता की दुनिया अनजान ज़ोख़िमों से भरी हुई थी और वे उस से भयभीत रहती थीं. उनके ख़्याल से रसोईघर में खेलना मूर्खतापूर्ण और ख़तरनाक था. एक बार तीता ने उन्हें मना लिया कि वे रसोई में आकर उसके साथ लाल गर्म तवे पर पानी की बूंदों का आश्चर्यजनक नृत्य देखें.
अपने गीले हाथों से तवे पर पानी की बूंदें छिड़कती हुई तीता जब गा रही थी ताकि वे भी नाचें, रोसौरा हक्की-बक्की एक कोने में दुबकी खड़ी थी. वहीं गरत्रूदिस को यह बेहद आकर्षक लगा और उत्साहपूर्वक वह भी इस खेल में शामिल हो गई - ऐसा उत्साह वह हर ऐसी चीज़ में दिखाती थी जिसमें लय, गति और संगीत शामिल हों. फिर रोसौरा ने स्वयं को शामिल करने की कोशिश की - लेकिन उसने बमुश्किल अपने हाथ गीले किए थे और वह बहुत सावधानी से पानी छिड़क रही थी और उस तरह का प्रभाव पैदा नहीं हो पा रहा था. तीता ने उसके हाथ पकड़कर तवे के नज़दीक ले जाने चाहे, रोसौरा ने प्रतिवाद किया तो तंग आकर तीता ने उसके हाथ छोड़ दिए जो सीधा तवे से जा लगे. तीता की पिटाई हुई और आगे से बहनों के साथ उसकी दुनिया में खेलने की मनाही हो गई. फिर नाचा उसकी सहेली बन गई. भोजन से सम्बन्धित उन्होंने कई खेल बनाए. जैसे गांव के बाज़ार में उन्होंने एक आदमी को गुबारों से जानवरों की आकृतियां बनाते देखा तो सॉसेज से जानवर बनाने की बात उन्हें सूझी. उन्होंने हर किस्म के जानवर तो बनाए ही, कुछ की उन्होंने रचना भी की - हंस की गरदन कुत्ते की टांगों और घोड़े की पूंछ वाले जीव और ऐसे ही कई.
उसके लिए सॉसेज को बेहद धीमी आंच पर तला जाना चाहिए ताकि वे भूरे भी न हों और पूरी तरह पक भी जाएं. बाहर निकाल कर पहले से कांटे निकाली हुई सारडीन इसमें मिला दें. सारडीन की त्वचा पर अगर कोई काले धब्बे हों तो चाकू से उन्हें खुरच लिया जाना चाहिए. इसके बाद प्याज़, मिर्च और सारडीन के साथ पिसा हुआ ऑरेगानो इसमें मिला दें. रोल भरने से पहले इस मिश्रण को हल्का ठोस हो जाने के लिए छोड़ दें
रोल्स बनाने की प्रक्रिया का यह हिस्सा तीता को बेहद पसन्द था. रोल्स में भरे जाने से पहले इस भरवां मिश्रण की गन्ध उसे अच्छी लगती थी. गन्धों में बीता हुआ समय लौटा लाने की ताकत होती है - आवाज़ों और इन गन्धों के साथ, जिनका वर्तमान से कोई सम्बन्ध नहीं होता. गहरी सांस लेकर तीता को इस मिश्रण को सूंघना पसन्द था - पूर्वपरिचित गन्ध और धुंआं उसे उसकी स्मृति के संसार में पहुंचा देते.
यह याद करने की कोशिश करना व्यर्थ था कि पहली बार उसने इन रोल्स को कब सूंघा होगा. वह याद कर भी नहीं सकती थी. शायद यह उसके पैदा होने से पहले हुआ था. यह सारडीन और सॉसेज का विचित्र मिश्रण रहा होगा जिसके कारण उसने अपने दिव्य अस्तित्व के स्थान पर मामा एलेना के गर्भ में दे ला गार्ज़ा परिवार में उसकी बेटी बनने का फ़ैसला किया, ताकि वह इस परिवार के अलौकिक सॉसेज और स्वादिष्ट भोजन का आनन्द ले सके.
मामा एलेना के रैन्च पर सॉसेज बनाने का काम किसी अनुष्ठान जैसा होता था. पहले दिन वे लहसुन छीलने, मिर्चें साफ़ करने और मसाले पीसने का काम शुरू करते थे. घर की सारी औरतों को इसमें हिस्सा लेना होता था - मामा एलेना, उनकी बेटियां गरत्रूदिस, रोसौरा और तीता, खाना पकाने वाली नाचा और चेन्चा, घर की नौकरानी. दोपहर को वेडाइनिंग रूम की मेज़ के गिर्द इकठ्ठा होते और बातों बातों में समय जैसे उड़ता जाता जब तक कि अन्धेरा होने लगता. तब मामा एलेना कहतीं -
"आज के लिए इतना ही बहुत है."
कहते हैं अच्छे श्रोता के लिए एक शब्द ही काफ़ी होता है, सो यह सुनते ही वे झट से उठ कर अपने कामों में लग जातीं. पहले मेज़ साफ़ करनी होती थी उसके बाद हरेक को काम बांटे जाते - एक को मुर्गियां इकठ्ठा करना, दूसरी कॊ नाश्ते के लिए कुंए से पानी निकालना, तीसरी को चूल्हे के लिए लकड़ियां इकठ्ठा करना. उस दिन न कपड़ों पर इस्तरी होती थी, न कढ़ाई, न सिलाई. काम पूरा हो जाने के बाद वे अपने अपने कमरों में जाकर पढ़तीं, प्रार्थना करतीं और सो जातीं. एक दोपहर मामा एलेना द्वारा मेज़ छोड़ने की अनुमति देने से पहले तीता ने, जो तब पन्द्रह की थी, कांपती आवाज़ में बताया कि पेद्रो मार्क्विज़ उनके साथ बात करना चाहता है ...
एक लम्बी चुप्पी के बाद जिसके दरम्यान तीता को अपनी आत्मा सिकुड़ती सी लगी, मामा एलेना ने पूछा -
"और ये श्रीमान मेरे साथ क्या बात करना चाहते हैं?"
तीता का जवाब बमुश्किल ही सुना जा सकता था.
"मुझे पता नहीं."
मामा एलेना ने तीता पर एक निगाह डाली जिसमें तीता को लगा कि वर्षों से परिवार पर किए गए अत्याचार भरे हुए थे, और कहा -
"अगर वह तुम्हारा हाथ मांगना चाहता है तो उस से कहो भूल जाए. वह अपना और मेरा समय बरबाद करेगा. तुम्हें अच्छी तरह मालूम है परिवार की सबसे छोटी लड़की होने के नाते तुम्हें उस दिन तक मेरा ख्याल रखना होगा जब तक मैं मर नहीं जाती."
उसके बाद मामा एलेना हल्के से अपने पैरों पर खड़ी हुईं. चश्मा अपने एप्रन की जेब में रखा और अन्तिम आदेश के स्वर में कहा -
"आज के लिए इतना ही बहुत है."
(जारी)
Thursday, April 21, 2011
जैसे चॉकलेट के लिए पानी - १
लॉरा एस्कीवेल का उपन्यास जैसे चॉकलेट के लिए पानी समूचे दक्षिण अमेरिका में अब तलक एक कल्ट की सूरत ले चुका है. यह अपने तरीके का इकलौता उपन्यास है. इस का प्रकाशन १९९० में हुआ था. मूल स्पानी भाषा में इसकी बिक्री के सही सही आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं पर अंग्रेज़ी भाषा में अकेले अमेरिका में ही इसकी एक करोड़ से ऊपर प्रतियां बिकी हैं. दुनिया की कोई तीसेक भाषाओं में अनूदित हो चुकी इस शानदार किताब का अनुवाद ख़ाकसार ने आज से नौ बरस पहले किया था. स्पानी भाषा से सीधे हिन्दी में किया गया यह मेरा पहला अनुवाद था. यह किताब अधिक लोगों तक नहीं पहुंच पाई. हिन्दी की किताबें पहुंचती ही कितनों तक हैं?
आज से मैं इस किताब के शुरुआती अंश यहां कबाड़ख़ाने पर लगाना शुरू कर रहा हूं. कितने हिस्से कब तक लगाऊंगा कुछ कह नहीं सकता - आप लोगों के रेस्पॉंन्स पर सब निर्भर करता है. पेश है -
अध्याय १ - जनवरी
क्रिसमस रोल्स
आवश्यक सामग्री -
१ कैन सारडीन्स
१/२ चोरीज़ो सॉसेज
१ प्याज़
ऑरेगानो
१ कैन सेरानो मिर्च
१० कड़े रोल्स
बनाने की विधि -
बहुत सावधानी से प्याज़ को बारीक बारीक काटिये. प्याज़ काटते हुए आप रोएं नहीं (जो बहुत झुंझलाने वाला होता है), इसके लिए आप थोड़ा सा अपने सिर पर रख लें. प्याज़ काटते वक़्त रोने में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि एक बार आंसू निकलने शुरू हुए कि वे निकलते ही जाते हैं - आप उन्हें रोक ही नहीं सकते. पता नहीं आपके साथ ऐसा कभी हुआ है या नहीं, मेरे साथ तो कई बार हो चुका है. मामा कहा करती थीं ऐसा इसलिए था कि मैं प्याज़ के प्रति ज़्यादा संवेदनशील थी, जैसी मेरी चचेरी दादी तीता.
तीता प्याज़ के प्रति इतनी संवेदनशील थी कि, लोग कहा करते थे, जब भी प्याज़ काटे जाते वह रोती ही जाती थी. जब वह परदादी के पेट में थी उसकी सिसकियां इतनी तेज़ होती थीं कि खाना बनाने वाली नाचा, जो आधी बहरी थी, भी आराम से उन्हें सुन लेती. एक बार उसकी सिसकियां इस कदर तेज़ थीं कि परदादी को समय से पहले ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. इसके पहले कि उनके मुंह से एक भी शब्द या कराह निकल पाते, रसोईघर की मेज़ पर नूडल सूप, पुदीने और लहसुन, और हां प्याज़ की महक के बीच तीता समय से पहले ही दुनिया में आ गई. तीता को वह चपत मारने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी जो नवजात शिशु को रुलाने के लिए मारी जाती है, क्योंकि वह रोती हुई पैदा हुई थी. शायद इसलिए भी कि उसे तभी मालूम था कि इस जन्म में उसका ब्याह नहीं हो पाएगा. जैसा कि नाचा बताती थी, तीता एक तरह से आंसुओं में बहती हुई इस दुनिया में पहुंची. आंसुओं का ज्वार मेज़ के किनारे से रसोईघर के फ़र्श पर बाढ़ की शक्ल में गिरता रहा.
उस दोपहर, कोलाहल शान्त हो चुकने के बाद जब सूरज ने भी आंसुओं को सुखा दिया था, नाचा ने लाल पत्थरों के फ़र्श से आंसुओं का सूखा हुआ नमक बुहार कर इकठ्ठा किया. नमक इतना था कि उस से दस पाउन्ड का एक कट्टा भर गया - रसोई में लम्बे समय तक उसे इस्तेमाल किया गया. शायद अपने असामान्य जन्म के कारण ही तीता को रसॊई से विशेष लगाव रहा, जहां उसने अपने जीवन का लम्बा हिस्सा गुज़ारा.
तीता जब दो ही दिन की थी, मेरे परदादा दिल का दौरा पड़ने के कारण चल बसे और इस सदमे से परदादी की छातियां सूख गईं. चूंकि उस ज़माने में पाउडर का दूध भी नहीं मिलता था और कोई नर्स भी नहीं मिली जो बच्ची को दूध पिला सके, सारे घर में बच्ची की भूख को लेकर कोहराम मच गया. नाचा ने जिसे खाना पकाने के बारे में सब कुछ आता था, तीता के पोषण का ज़िम्मा लेने का प्रस्ताव किया. उसे लगा बच्ची के पेट को "शिक्षित करने" का यह बेहतरीन अवसर था. हालांकि उसने शादी नहीं की थी, न उसके बच्चे ही हुए थे. उसे लिखना-पढ़ना नहीं आता था लेकिन पाकशास्त्र की वह विशेषज्ञ थी. मेरी परदादी मामा एलेना ने कृतज्ञतापूर्वक उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. अपने शोक के बावजूद उनके पास करने को बहुत सारे काम थे. उन्हें रैंच कॊ ज़िम्मेदारी सम्हालनी थी - बच्चों के भोजन और पढ़ाई-लिखाई का खर्च वहीं से निकलना था, क्योंकि इतने के तो अधिकारी वे थे ही. इस सबके बाद नवजात बच्ची को खिलाने-पिलाने का ज़िम्मा बहुत कष्टप्रद होता.
उस दिन से रसोईघर तीता का साम्राज्य बन गया. चाय और मक्के के पतले सूप पर तीता बड़ी होती गई. खाने से सम्बन्धित किसी बात पर तीता की छठी इन्द्रिय का रहस्य यही था कि उसके खाने के समय रसोई की दिनचर्या से जुड़े हुए थे. सुबह उसे बीन्स उबलने की ख़ुशबू आ जाती, दिन में उसे पता लग जाता कि पानी तैयार है और मुर्गी के टुकड़े करने का वक़्त हो गया. शाम को डबलरोटी बेक हो जाने भी उसे अहसास हो जाता. तीता जान जाती उसे खाना खिलाए जाने का समय हो गया है.
(जारी)
Subscribe to:
Comments (Atom)











