Wednesday, June 13, 2012

तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे - उस्ताद मेहदी हसन खान का प्रयाण


बहुत अफ़सोस की खबर है. बहुत लंबे समय से बीमार चल रहे गज़ल गायकी के शहंशाह उस्ताद मेहदी हसन खान साहेब नहीं रहे.

कबाड़खाने की विनम्र श्रद्धांजलि.

4 comments:

दीपिका रानी said...

बेहद दुखद खबर... मखमली आवाज़ के मालिक अब सिर्फ अपनी ग़ज़लों में ज़िन्दा रह गए हैं।

राजेश उत्‍साही said...

इसीलिए वे हमेशा जीवित रहेंगे।

संतोष त्रिवेदी said...

आपके और हमारे चहेते गायक नहीं रहे.दरअसल ऐसी शख्सियत को महज़ गायक कहना भी उचित नहीं है.मेंहदी साहब हमारे जीवन का हिस्सा थे और ऐसे में उनका न रहना हमें हमारी रूह से जुदा करता है :-(

...तुम कहीं नहीं गए,शामिल मेरी साँसों में हो,
रंजिश ही सही पास मेरे,लौट आओ तुम !

दिगंबर नासवा said...

Vinamr shradhanjali hai ... Gazal ke mahanayak ko ...