Showing posts with label मार्सिन स्विएतलिकी. Show all posts
Showing posts with label मार्सिन स्विएतलिकी. Show all posts

Saturday, May 21, 2011

यान पोल्कोव्स्की के लिए नहीं - मार्सिन स्विएतलिकी की कविता


(पिछली कविता से आगे)

यान पोल्कोव्स्की के लिए नहीं

तमाम दिक्कतें उस कविता के साथ.
श्श्श! मत जगाओ प्रेतों को. सात साल बीत चुके ह.
साहित्य का इतिहास डकार जाता है सब कु़छ. श्श्श.
ज़्यादा विवेक होता है आसमान के इतिहास के पास.

नया क्या है? ज़्यादा कुछ नहीं. हम साधे जाते हैं
अपनी असामान्य वाक्पटुता और अपने सस्ते
खेलों को मन्दबुद्धि पाठकों के साथ (प्रिय पाठक,
जनाब क्रिस कोहलर यही समझते हैं आपको)

नया क्या है? ज़्यादा कुछ नहीं. इतने सारे कैद किए जा चुके.
लेकिन फ़ैज़ का क्या हुआ? मैंने किन्डरगार्टन में ही खो दी थीं
नेतृत्व की अपनी सारी योग्यताएं. मैं अपने हथियार नीचे रख देता हूं.
मैं बैठता हूं और कविता बेचता हूं (अलबत्ता जनाब एम. बैरन

ने मुझे सलाह दी है, सन्जीदगी से सलाह दी है कि मैं ऐसा न करूं.)
मैं सांस लेता हूं. और दग़ा देता हूं. मैं बेचता हूं. मैं असहज हूं.
नियन्त्रण में. बढ़िया. मुझे पुलिस
और यातना दो. मैं आज़ादाना कविता लिखूंगा

और ईश्वर को उसमें उलझा दूंगा, चेचन्या, बाल्कन
और तुम्हें भी. जैसे भी हो सके. सब कुछ किया जा सकता है.
साहित्य का इतिहास डकार जाता है सब कु़छ. यह सच है.
ज़्यादा विवेक होता है आसमान के इतिहास के पास.

यान पोल्कोव्स्की के लिए - मार्सिन स्विएतलिकी की कविता


यान पोल्कोव्स्की के लिए

वक्त हुआ कार्डबोर्ड के नन्हे दरवाज़ों को बन्द किया जाए और एक खिड़की खोली जाए,
एक खिड़की खोली जाए और थोड़ी हवा को आने दिया जाए इस कमरे में.
पहले किस्मत हमेशा साथ होती थी जिस पर निर्भर रहा जा सकता था
अब वह खत्म हो चुकी. सिवा एक अपवाद के -
जब कविताएं जाती हैं और पीछे छोड़ जाती हैं अपनी दुर्गन्ध.

ग़ुलामों की कविता जीवित रहती है विचारों पर,
और विचार होते हैं रक्त का पानीदार विकल्प.
कारागार में रहते हैं नायक,
और कामगार बदसूरत होता है अलबत्ता ज़रा सा
मददगार - ग़ुलामों की कविता में.

गुलामों की कविता में पेड़ों के भीतर सलीबें
होती हैं - उनकी छाल के नीचे - कांटेदार तार की बनीं.
तो कितना आसान होता है ग़ुलाम के लिए
वर्णमाला से ईश्वर तक की विकट लम्बी
और असल में असम्भव सड़क पर चलना, वह बनी रहती है बस एक पल को
जैसे थूकना - ग़ुलामों की कविता में.

बजाए कहने के - मुझे दांतदर्द है, मैं
भूखा हूं, मैं अकेला हूं, हम दोनों, हम
चारों, हमारी पूरी गली - वे ख़ामोशी से कहते हैं: वान्डा
वासीलेव्स्का, सिप्रियन कामिल नोर्विड,
जोसेफ़ पिल्सुद्स्की, युक्रेन, लिथुआनिया,
थॉमस मान, बाइबिल, और अन्त में
यिदिश भाषा में एकाध शब्द.

अगर ड्रैगन अब भी रह रहा था इस शहर में
तो वे अपनी खुशामदों से ड्रैगन को मार डालेंगे - या सिमट
जाएंगे किसी कोने में ताकि कविताएं लिख सके-
ड्रैगन को डराने के लिए नन्ही मुठ्ठियां
(हरेक प्रेम कविता लिखी जाएगी
एक ड्रैगन वर्णमाला में ...)

मैं सीधा देखता हूं ड्रैगन की आंखों में
और अपने कन्धे उचकाता हूं. जून का महीना है. साफ़ दिख रहा है.
इस दोपहर यहां आया था एक तूफ़ान. गोधूलि उतरेगी
सबसे पहले शहर के बिल्कुल चौकोर चौक पर.

(यान पोल्कोव्स्की: मार्सिन स्विएतलिकी के समकालीन पोलिश कवि; वान्डा वासीलेव्स्का, सिप्रियन कामिल नोर्विड और जोसेफ़ पिल्सुद्स्की: क्रमशः विख्यात पोलिश साहित्यकार, कवि और सेनानायक; थॉमस मान: १९२९ के नोबेल पुरुस्कार विजेता जर्मन मूल के उपन्यासकार, सामाजिक आलोचक और निबन्धकार)

---

(इस कविता का एक अगला भाग भी है जिसमें दर असल यह कविता पूरी होती है - कल पढ़िये वो वाला हिस्सा)

Sunday, May 15, 2011

याददाश्त के साथ कुछ दिक्कतें


पोलैण्ड के युवा कवि मार्सिन स्विएतलिकी की दो और कविताएं पेश हैं.

अध्यापन-कला

माना जाता है युद्ध
अध्यापन-कला का उच्चतम प्रारूप है. और मृतक
होते हैं सबसे मेहनती
छात्र.

वह महान शिक्षा - लड़कों का तब्दील होना
सिपाहियों में - सॉकर और सर्कस के माध्यम से.
सोने का बहाना बनाए हुए
इन्तज़ार करता पसरा रहता है युद्ध.

गर्मियों के पहले दिन. रसभरियों के ढेर.
आज एक भगोड़ा हूं मैं, लेकिन कल यह क्या हो चुका होगा?
मैं इन्तज़ार करता हूं और अमूर्तनों को चिठ्ठियां लिखता हूं.
और कोई रियायतें नहीं.
ज़ोर देती है ख़ामोशी.

याददाश्त के साथ कुछ दिक्कतें

सो जांच करो कि क्या वह वाकई बिना पैरों वाला
सीसे का सिपाही ही था (क्या नर्तकी गिरी थी
आग में? और क्या वह जल गई थी? और वह सिपाही? वे आग तक कहां से पहुंचे?
खिलौने की किसी दुकान से. या किसी बच्चे के कमरे से?)
जांचो, खोजो, मुझे किताब की पीठ दिख रही है यहां से,
मगर मैं उठता नहीं (उस चूहे ने पूछा - पासपोर्ट?
पासपोर्ट है तुम्हारे पास? सिपाही कहां से
पहुंचा इस गन्दी नाली तक? फिर आग तक? उस से पहले?
और कैसी थी वह? गूंगी? बेपरवाह?
क्या प्यार करती थी उसे?) जांचो,
अभी नहीं. एक
उचित, ख़ास पल
का इन्तज़ार करो. मुझे याद नहीं आ रहा - क्या वह खड़ा था?
क्या वह उसकी तरफ़ देख रहा था? और वह? उसके बारे में क्या?
क्या वह खड़ी थी? और क्या उसकी तरफ़ देख रही थी? मुझे नहीं पता.
अन्त के बारे में मुझे पता नहीं.
फ़िलहाल तो मुझे काम चलाना होगा उस कामुक सूक्ष्मता से
जिसकी मदद से मैं निगाह धरे हूं सब पर.

Saturday, May 14, 2011

मार्सिन स्विएतलिकी की एक और कविता

समकालीन पोलिश कविता में बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण नाम माने जाने वाले मार्सिन स्विएतलिकी की कई कविताएं यहां पोस्ट्की जा चुकी हैं. आज एक और -


क्य़ा तुम्हें पसन्द है यह बग़ीचा?

जब मैं अपना धूप का चश्मा उतारता हूं
और भी ख़ौफ़नाक है यह संसार जिसमें मैं हूं.
लेकिन यह वास्तविक है. सच्चे रंग
रेंग रहे हैं अपनी सही -सही जगहों की तरफ़.
एक सांप फ़िसलता जाता है हर उस चीज़ के ऊपर से
जो उसके रास्ते में आती है. उसने हमें भी छुआ है.

बर्फ़ गिरती है और हरेक चीज़ को ढंक लेती है.
शहर को अब भी देखा जा सकता है - एक काला
कंकाल, जिसे यहां-वहां छोटी कारों की हैडलाइटों ने
चमका रखा है, मैं एक सुविधापूर्ण जगह पर बैठता हूं
और देखता हूं. शाम है. सारे मेले-उत्सव
बन्द हो चुके अब.

शाम. आदमी लौट रहे हैं अपनी लूट के साथ.
ईर्ष्यालु पादरी बस अपने आप को बचाए रखने में
समर्थ. एक कुत्ता कुछ देर हमारी बग़ल में चलता रहा
गंधाता हुआ. मेरे व्यक्तिगत दस्तावेज़
अलग-थलग हो चुके. अलग-थलग हो चुकी
हर चीज़ जिसे प्यार किया मैंने. अलबत्ता मैं अब भी साबुत हूं एक.

मेरे बारे में कुछ नहीं है संविधान में.

Wednesday, May 11, 2011

तलघर से गीत

मार्सिन स्विएतलिकी की कविताएं अभी कुछ समय और पोस्ट करने का इरादा रखता हूं. आज उनकी दो छोटी कविताएं -

तलघर से गीत

तलघर के फ़र्श पर बिछे हुए हैं पत्थर
ठीक जिस तरह आकाश पर हैं,
लेकिन तलघर में पैदा होते हैं
सिर्फ़ सफ़ेद और अन्धे पशु.

अगर, बेपरवाही में आप अपना हाथ
सड़ते हुए अवशेषों के बीचोबीच डालेंगे
- आपको महसूस होगा एक नन्हा सा हृदय
एक अनन्त गतिमान शुरूआत.

ऊपर एक भारी शोर. ऊपर की मंज़िल पर
आज छुट्टी का दिन. और यहां - आधे अन्धेरे में -
यहां कोई छुट्टी नहीं होती. तलघर की खिड़की से
आपको दिखते हैं कीलजड़े तलों वाले बूट, बस.

दोपहर

रोशन बग़ीचे से तलघर तक: रात.
हर चीज़ मेल खाती है: यहां तलघर में
फूलों को अभी से तह कर रहा जा चुका, पत्तियां काली पड़ चुकीं.
रात के तले कुछ है, तलघर के तले, कुछ तो है
- अन्तिम प्रौढ़ता.

Tuesday, May 10, 2011

विश्वविद्यालय : मार्सिन स्विएतलिकी की कविता

विश्वविद्यालय

ऐसी कोई चीज़ नहीं जिस पर शर्मसार हुआ जाए - लड़के ने
दुछत्ती में सीखी चीज़ें - किसी भी और क़िस्म की
शिक्षा अनावश्यक है - वह उछला कर बाहर आया रात के पहले पहर
अपने बिस्तर से - सीढ़ियां चढ़कर - उसने बन्द कर दिया वार्डरोब का प्रवेशद्वार - निश्चित कदमों
के साथ वह दुछत्ती के बीचोबीच पहुंचा - मकड़ियां अलबत्ता तैनात, सीधी खड़ी थीं
अपनी सन्तरी-चौकियों पर.
लड़के ने अपने कपड़े उतारे, खड़ा रहा, तल्लीन.

छत के छेद से, आसमान बोल रहा था,
आसमान से, अलबत्ता. परिन्दे बोल रहे थे,
चिड़ियों के साथ बोल रहे थे
एक बहरे-गूंगे ईश्वर के हाथ. महान अच्छापन
उपजता है गूंगे-बहरेपन से.

Sunday, May 8, 2011

नक्शे पर एक नया और ख़तरनाक तत्व - प्रौढ़ता


मार्सिन स्विएतलिकी की कविताएं आप कल से पढ़ रहे हैं. इस कवि की रेन्ज और ज़ोख़िम उठाने की ताकत मुझे लगातार चकित करती रही है. प्रेम और ख़ासतौर पर पुरुष के प्रेम के साथ ऐसा क्रूर और सचमुच तटस्थ सुलूक करते हुए मैंने पहले कभी देखा हो, याद नहीं पड़ता.

लोग

वे एक दूसरे को प्यार करते हैं, और पंजीकृत हैं
उनके काग़ज़ात बिल्कुल सही हैं.
उनके पास उनकी बीमारियां हैं, वे दवाओं और साहित्य
की मदद से अपना ख्याल रखते हैं.

वे जीते हैं, और मैं कविताएं
लिखता हूं उनके बारे में
मैं उघाड़ता हूं उनके इतिहास की ईंटें और गारा
और यह, जहां तक मैं स्वीकार करूंगा, दग़ाबाज़ी नहीं है.

जिसे कोई प्रेम नहीं करता वह दग़ा नहीं देता
जिसे कोई प्रेम नहीं करता
खड़काता चलता है अपनी जेब में धरे
एक बेकाम चाभी.


वसन्त की शुरूआत

तो मैंने फिर से फ़ोन किया - बस जांचने भर को
रिसीवर उठाया गया, कहा गया - "वो यहां नहीं है."
नहीं. कुछ नहीं. कुछ भी नहीं, न्ना. कोई ख़ास बात नहीं.
सारा कुछ साफ़ है अब. वो रहा, बस यूं ही,
मैंने फ़ोन किया. बस जांचने को. तुम गढ़े हुए
एक कारण को बदल सकते हो दूसरे से. या यह भी हो सकता था
कि तुमने फ़ोन किया ही न होता. अब सब साफ़ है.

कमरे के भीतर एक चिड़िया उड़ती है - जिसे
चिड़ियों के बारे में एक किताब से फाड़ा गया है. और किताबों के आवरण
और और ज़्यादा फटे हुए. घर में पड़े हुए हैं
बहुत सारे मुखविहीन सूरजमुखी. वसन्त के
शुरूआती दिन है. बहुत शुरुआती दिन.
वह खिड़कियों से पसर रहा है मुलायम. आकाश में
महान पाखण्डी सूरज. कृपया छुएं नहीं
- हम में बिजली दौड़ रही है. बिजली के जीवित सांप.

नक्शे पर एक नया और ख़तरनाक तत्व -
प्रौढ़ता. ख़ामोशी और लिखा जाना ढेरों
प्रेम कविताओं का, सब बेकार, बहुत देर हो चुकी.
झण्डा उतार कर सम्हाला जा चुका
पुराने अख़बारों में - और छिपा हुआ किसी ताक पर.
मैं खिड़की से बाहर देखता हूं - मैं खोज रहा हूं एक जगह
जहां बो सकूं अपना गर्म वीर्य.

Saturday, May 7, 2011

मैं कोई कहानी नहीं सुना रहा - मार्सिन स्विएतलिकी की कविता - 4


संसार

सबसे शुरू में मेरा सिर है, मेरे हाथों में
फिर वहां से पसरना शुरू करते हैं घेरे.
एक चौकोर मेज़, एक वृत्त, कमरा, एक वृत्त. इमारत
एक वृत्त. सड़क, एक वृत्त. शहर, एक वृत्त. देश,
एक वृत्त. और महाद्वीप लिपटा हुआ एक वृत्त में.
अर्धगोलार्ध, एक वृत्त. एक वृत्त. सब कुछ, एक वृत्त.
एक नन्हीं सी बूंद के ऐन किनारे पर.


शनिवार, आवेग

मेज़ पर, एक सिगरेट के साथ.
बहुत बुरी नींद सोया हूं.
"कपड़े उतारो और वापस आ जाना," जाग चुकने पर वह कहती है,
"खिड़की खोल दो"
खुली खिड़की से कमरे के भीतर आती है
एक भोर-नीली उंगली. मैं वापस जाता हूं, हम एक दूसरे से लिपटते हैं.
सोता हूं बहुत बुरी नींद.


प्रारम्भ

बादलों से गिरी बर्फ़ शहर पर चमकती है
सफ़ेद फ़ुटपाथ
आख़िरी सफ़ेदी के साथ.

दवा की दुकानों से, टीबी की गन्ध. खिड़की पर
बिना नाम का, रोशनी और कीटाणुओं से बना
एक फूल.

मैं कोई कहानी नहीं सुना रहा, मैं कांप जाता हूं. जल्दी ही
उतरेगी कीचड़.

अपना नकाब उतारता है आसमान - मार्सिन स्विएतलिकी की कविता - ३


शीर्षकहीन

मैं पैलेस ऑफ़ आर्ट्स को जाने वाली
सीढ़ियां बुहार रहा हूं. यह कोई उपमा नहीं है
असली बात है. थोड़ा ज़्यादा नकदी.
कविता को किसी तरह अपना जीवन चलाना होता है. कविता को भोजन चाहिए होता है..
वसन्त का मौसम है. सर्दियां छोड़ गई हैं अपने पीछे अपनी गर्द -
यह सफ़ेद पदार्थ इतनी आसानी से बदल जाता है गीले
काले और चिपचिपे गाद में. यह ढेर सिगरेट की ठुड्डियों, कागज़ों, चिड़ियों की बीट
कुत्तों की टट्टी का और वह शायद
मानव-विष्ठा है.
इसमं भी कोई उपमा नहीं है - असली बात है यह.
शब्दों के मेरे इस्तेमाल ने मुझे
पहुंचाया है इस जगह तलक. बादल घिर रहे हैं.
सारा कुछ बहा कर नहीं ले जाएगी बारिश.


मंगलवार, मार्च

यहां
हम होंगे प्रेमी, एक पपड़ाते मकान में
हम एक दूसरे के सामने से गुज़रेंगे, चौराहों पर
भीतर तक छीलते हुए

गद्दे को? निश्चित ही एक गद्दा, सिर्फ़ गद्दा,
और ऐशट्रे? एक ऐशट्रे, दो प्याले
और कटोरे, एक केतली, एक तश्तरी, दो,
और संगीत? संगीत, अन्तहीन संगीत

धीमे-धीमे परतें, और और परतें
परछाईं की परत, देह के ऊपर हाथ, हौले से
बुनावट, हौले से खुरदरापन

अपना नकाब उतारता है आसमान
अलग होता है, किसी परदे की तरह
सामने प्रकट होती है एक साफ़-रोशन गुफा.

एम. - काला सोमवार

वह क्षन जब सारे शहर की सड़कों की रोशनियां
जलती हैं एक साथ. वह क्षण जब तुम कहती हो
अपना अविश्वसनीय "नहीं", और अचानक मैं नहीं जानता
मुझे अब क्या करना चाहिए - मर जाना? दूर चले जाना? कोई प्रतिक्रिया न देना?
धूप में वह क्षण जब मैं तुम्हें देखता हूं बस के भीतर से,
तुम्हारा चेहरा उस से फ़र्क जैसा वह होता है जब तुम जानती हो मैं तुम्हें देख रहा हूं
-और अब तुम मुझे नहीं देख सकतीं, तुम शून्य को देख रही हो, मेरे सामने की
कांचदार चमक को. अब और नहीं मैं, मेरे साथ नहीं,
इस तरह नहीं, यहां नहीं. कुछ भी
हो सकता है, चूंकि सब कुछ होता है. हरेक चीज़ तीन
बुनियादी स्थितियों में परिभाषित है - स्त्री के ऊपर पुरुष,
पुरुष के ऊपर स्त्री, या जैसे इस वक्त
- स्त्री और पुरुष रोशनी से विभाजित.

पेड़ों के सर्जक ने उनके लिए नर्क नहीं बनाया


मार्सिन स्विएतलिकी (जन्म १९६१) को अभी से समकालीन पोलिश कविता का सबसे जटिल, सब्से वैविध्यतापूर्ण और विद्रोही स्वर माना जाता है. अपने करियर की शुरुआत में ही उन्होंने मंच पर पोलिश कविता के स्तम्भ चेस्वाव मिवोश से एक पुरुस्कार लेने से इन्कार कर दिया और वहीं से अपनी एक कविता ’एक दिन मेरा होगा यह शहर’ का पाठ कर डाला. १९९२ में मार्सिन स्विएतलिकी के पहले संग्रह के छपने को पिछले दशक में पोलिश साहित्य में घटित सबसे सनसनीखेज़ घटना माना गया. वे क्राकोव में एक मशहूर साप्ताहिक पत्रिका में बतौर प्रूफ़रीडर काम करने के साथ ही अपना रंगसमूह चलाते हैं. उन्होंने अपनी कुछेक कविताओं को बाकायदा संगीतबद्ध कर उनके अल्बम रिलीज़ किए हैं. उनके तकरीबन एक दर्ज़न कविता संग्रह छप चुके हैं. अपनी कविताओं में स्विएतलिकी वक्तव्यात्मक कविता, राजनैतिक विरोध, अतिशास्त्रीय भाषा और छद्म ऊंचे आदर्शों को लेकर सवाल उठाते हैं. इसके स्थान पर वे व्यक्ति पर अपना ध्यान उसके दर्द और असुविधा के हिसाब से लगाते हैं जो एक व्यक्तिगत सरहद खींचने में तो उनकी सहायता करता ही है, आवारा अमूर्तन से भी उनकी कविता को बचाता है. अन्धकार और दर्द की अनुभूति कर पाने की उनकी यह क्षमता ही उन्हें अपने समकालीनों के बीच बचाए हुए है - रचनात्मकता और सतत परिपक्वता के साथ. स्विएतलिकी की भाषा में रूखा ह्यूमर, विडम्बना और क्षेत्रीय लहज़ा पाए जाते हैं – इन्हीं की मदद से वे अपनी कविता को आकार देते हैं जिसमें मृत्यु और दर्द, दर्द और जीवन और जीवन और इच्छा के बीच एक ज़ोखिमभरा सन्तुलन पाया जाता है.

सुबह की कविताओं के बाद अब उनकी कविताओं की दूसरी खेप -


१.
पेड़ों के बारे में कुछ सच


पेड़ों के पास नहीं होती अपनी पवित्र पुस्तक
पेड़ों के पास ज़रूरत से ज़्यादा रोशनी, हवा और बारिश होती है
पतली शाखाएं स्वर्ग तलक पसरती हुईं

पेड़ों का स्वर्ग हरा, ताकतवर और खुशबूदार होता है
पेड़ों का सर्जक उन्हीं जैसा हरा और ताकतवर होता है
उनके सर्जक ने पेड़ों के लिए नर्क नहीं बनाया

न कोई पाप है वहां न कोई कर्तव्य
इतना बहुत है कि हुआ जाए, फरफराया जाए पसरा जाए
इतना बहुत है कि बढ़ा जाए शाखाओं में फूटने की इच्छा की जाए

पेड़ों के सर्जक ने उनके लिए नर्क नहीं बनाया
जो सबसे ख़ास चीज़ ग़ौर करने की है वह है पेड़ की मुलायम बेपरवाही
जिसके साथ वे स्वीकार कर लेते हैं अपनी निचली शाखाओं से टंगे मनुष्यों को.

२.
पहली अप्रैल, वाग्रोविक, पोलैण्ड


जगा हुआ. तुरन्त उलझा
झील के मसलों से. भोर से कुछ
घन्टे पहले. सम्भवतः. और झील अभी से
जीवित है, सांस लेती हुई, हंसों को भेजती
उस पर निगाह मारने को - वह अन्धेरे में एक
छाया, ढूंढती हुई मानवीय टर्मिनल का रास्ता. चैतन्य. खोया हुआ.
घास की पहली कोंपलें उड़ान भरना शुरू करती हैं अन्धेरे मैदान से.
किसी अन्धे की तरह. किस लिए? खुद के बिना, समय के बिना.
समय इस कदर पसर गया है कि
उसे देखा नहीं जा सकता. खोया हुआ अन्धेरे में.
जगा हुआ. किस लिए? अगर अब भी होती उसके पास
पहले कम्यूनियन में मिली हुई घड़ी
अगर, किसी खास समय पर वह बन गया होता स्काउट
और होती उसके पास एक कुतुबनुमा, अगर उसे आता होता
ठीक से इस्तेमाल कर पाना कुतुबनुमा का

-यहां नहीं होता वह.

३.
फ़ोटोग्राफ़


गली के कोने पर एक प्रेत - जैसे
किसी धूलभरे तूफ़ान का नन्हा सा हिस्सा - जैसे
आवारा हो गए दुःख - निकल पड़े खोजने किसी को
मैंने खिड़की खोली - वह अब भी बना हुआ है
गली के कोने पर अब भी एक झोंके सा
मैं झुका हुआ आगे को, उम्मीद करता हुआ कुछ घटने की
और सर्दियों के एक सूरज के कड़ियल नक्श.

यह उसकी वजह से है कि भूखे हो तुम

आधुनिक सन्दर्भों में गहरे राजनैतिक अर्थ समेटे यह दो कविताएं युवा पोलिश कवि मार्सिन स्विएतलिकी की लिखी हुई है. इस कवि का विस्तृत परिचय और उनकी कुछेक कविताएं थोड़ी देर में.

मैक्डोनल्ड्स*

मुझे तुम्हारे दांतों के निशान मिलते हैं एक दूसरे शहर में
मुझे तुम्हारे दांतों के निशान मिलते हैं मेरे बाज़ू पर
मुझे तुम्हारे दांतों के निशान मिलते हैं आईने पर
कभी कभी मै होता हूं एक हैम्बर्गर

कभी कभी मै होता हूं एक हैम्बर्गर
जिस से बाहर निकला चाहता है सलाद का पत्ता
और टपकती हुई सरसों
कभी कभी मैं घातक तरीके से
बाकी सारे हैम्बर्गरों जैसा होता हूं.

पहली परत, त्वचा
दूसरी परत, खून
तीसरी परत, हड्डियां
चौथी परत, आत्मा
और इस सारे के नीचे, निशान तुम्हारे दांतों के.


(*एक ज़माने में मैक्डोनल्ड्स को पोलैण्ड में पश्चिम की अप्राप्य वस्तुओं में आदर के साथ शुमार किया जाता था. जब १९८० के दशक में यह कम्पनी अन्ततः पोलैण्ड पहुंची उसके साथ प्रेम-घृणा का वही व्यवहार हुआ जैसा समूचे यूरोप में अब तक होता है. पोलैण्ड के ऐतिहासिक नगर क्राकोव में सिर्फ़ एक मैक्डोनल्ड्स का खोमचा खोलने की इजाज़त दी गई. ऊपर उसी की तस्वीर है)

ऐसा क्यूं है

ऐसा क्यूं है कि तुम्हारी चिन्ता इस तरह के शब्दों
के आगे-पीछे घूमा करती है - कारागार, आन्दोलन,
पश्चिम, पूर्व, आज़ादी, भोजन,
फ़लां या फ़लां चीज़ की उपलब्धता
राजनैतिक बन्दी?
छोटे शब्द हैं ये, ये सबसे छोटे शब्द हैं,
ऐसा क्यूं है कि तुम्हारी जीभ इन्हीं पर अटक गई?
क्या तुम्हें मालूम नहीं कि यह सारा कुछ
एक चुलबुली वैश्या के काबू में है
वही जिसे तुम प्यार करते हो, या शायद ऐसी चाह रखते हो
जो असल में उस आदमी को छांटती है
जिसे तुम नफ़रत करते हो, वह जो उसके साथ बदसुलूकी करता है
और उस की देह में कीलें ठोंकता है
यह उस वैश्या की वजह से है कि तुम इस कारागार में हो
यह उसकी वजह से है कि भूखे हो तुम.