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Tuesday, September 11, 2012

असीम त्रिवेदी पर फर्जी आरोप वापस लो, रिहा करो- जन संस्कृति मंच



कारपोरेट लूट और भ्रष्टाचार में गले तक डूबे सत्ताधारी हर विरोध के स्वर का गला घोंटने पे आमादा हैं. कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को देशद्रोह के जुर्म में गिरफ्तार करना खुद में एक आपराधिक कृत्य है. संसद सहित जिन संवैधानिक प्रतीकों और संस्थाओं का उपहास करने का आरोप असीम त्रिवेदी पर लगाया गया है, उन की धज्जियां खुद सरकार उड़ा रही है. कोयला घोटाले पर भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट को उसने खारिज कर दिया है, जबकि यह संस्था उतनी ही संवैधानिक है जितनी कि संसद या सरकार. फिर राष्ट्रीय चिन्ह में शेरों की जगह भेड़िये किसी कार्टून में दिखाना राष्ट्रीय चिन्ह का उपहास नहीं , बल्कि उन तत्वों पर करारा व्यंग्य है जिन्होंने 'राष्ट्र' को भेड़ियों के हवाले कर दिया है. संसदीय लोकतंत्र में हमारी कितनी ही आस्था हो, लेकिन यदि संसद खुद लोकतंत्र के प्रहसन में बदल जाए, तो कलाकार क्या उसके गुण गाएगा? रघुवीर सहाय द्वारा संसद का खींचा गया एक दृश्य देखिए-

'सिंहासन ऊंचा है सभाध्यक्ष छोटा है
अगणित पिताओं के
एक परिवार के
मुंह बाए बैठे हैं लड़के सरकार के
लूले काने बहरे विविध् प्रकार के
हल्की-सी दुर्गन्ध् से भर गया है सभाकक्ष'
रघुवीर सहाय ने ही यह भी लिखा था,
'राष्ट्रगीत में कौन खडा यह भारत-भाग्य-विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका गुन हरचरना गाता है'


क्या उपरोक्त पंक्तियों में महज संसद या राष्ट्र का उपहास है? उपहास है उन धनपशुओं और उनके राजनीतिक दलालों का जिन्होंने 'राष्ट्र' की सभी संस्थाओं, मर्यादाओं , प्रतीकों को खोखला बना दिया है, उन्हें हड़प लिया है . राष्ट्र के वास्तविक नागरिकों (किसानों, मजूरों , बहुजन) को 'राष्ट्र' के दायरे से बाहर खदेड़ दिया है. आज जिस तरह के अघोषित आपातकाल की स्थिति की ओर भारत अग्रसर है, उसका प्रतिकार सिर्फ 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' के तर्क से नहीं, बल्कि 'विकल्प की ज़रुरत' के तकाज़े से किया जाना भी ज़रूरी है.
जन संस्कृति मंच असीम त्रिवेदी पर लगाए सारे आरोपों और धाराओं को निरस्त करने, उनकी अविलम्ब रिहाई की मांग करता है और इसके लिए नागरिकों से आन्दोलन में उतरने की अपील करता है.

(-प्रणय कृष्ण, महासचिव , जन संस्कृति मंच द्वारा जारी)

Monday, September 10, 2012

आइये राजद्रोह करें

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी के विरोध में देखे जाएं कुछ राजद्रोही कार्टून -