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Monday, April 7, 2014

आँगन जुदा जुदा ही सही सूरज की धूप एक है


निदा फाज़ली के कलाम को ज़ुबान दी है मोहम्मद वकील ने. कबाड़खाने के पाठकों श्रोताओं को याद होगा हमने मोहम्मद वकील की बाबत यहाँ भाई संजय पटेल के सौजन्य से एक पोस्ट लगाई थी. आज यह पोस्ट पुनः उन्हीं के सौजन्य से. टीवीएस सारेगामा के मेगा फाइनल विजेता इस गायक के बारे में जगजीत सिंह ने कहा था कि वे आने वाले कल के सितारे हैं. फिलहाल अहमद हुसैन – मोहम्मद हुसैन के शागिर्द इस युवा गायक को हमारा सलाम. आनन्द लीजिये -

 

दीवारें उठाना तो हर युग की सियासत है
ये दुनिया जहां तक है इंसां की विरासत है

खुशियों में है चमक वही अश्कों में है कसक वही
चाहे कहीं भी जाओ तुम प्यार में है महक वही

हर आँख शरारत है हर दिल में मोहब्बत है
दीवारें उठाना तो हर युग की सियासत है

बच्चों की मुस्कराहटें माँ के दिलों की अहतें
एक ही हैं हरेक जगह चेहरों की जगमगाहटें
मैं तेरी ज़ुरूरत हूँ तू मेरी ज़ुरूरत है

देहों का रूप एक है, जल का स्वरूप एक है
आँगन जुदा जुदा ही सही सूरज की धूप एक है
मंदिर में जो मूरत है मस्जिद में वो कुदरत है

दीवारें उठाना तो हर युग की सियासत है

ये दुनिया जहां तक है इंसां की विरासत है