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Monday, March 23, 2015

भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की

सरदार सोभा सिंह का बनाया विख्यात चित्र
शंकर शैलेन्द्र

भगतसिंह से

- शंकर शैलेन्द्र

भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की,
देशभक्ति के लिए आज भी सज़ा मिलेगी फाँसी की !

मत समझो, पूजे जाओगे क्योंकि लड़े थे दुश्मन से,
रुत ऐसी है आँख लड़ी है अब दिल्ली की लंदन से,
कामनवैल्थ कुटुम्ब देश को खींच रहा है मंतर से-
प्रेम विभोर हुए नेतागण, नीरा बरसी अंबर से,
भोगी हुए वियोगी, दुनिया बदल गई बनवासी की !
  
सत्य अहिंसा का शासन है, राम-राज्य फिर आया है,
भेड़-भेड़िए एक घाट हैं, सब ईश्वर की माया है !
दुश्मन ही जब अपना, टीपू जैसों का क्या करना है ?
शान्ति सुरक्षा की ख़ातिर हर हिम्मतवर से डरना है !
पहनेगी हथकड़ी भवानी रानी लक्ष्मी झाँसी की !

यदि जनता की बात करोगे, तुम गद्दार कहाओगे-
बम्ब सम्ब की छोड़ो, भाषण दिया कि पकड़े जाओगे !
निकला है कानून नया, चुटकी बजते बँध जाओगे,
न्याय अदालत की मत पूछो, सीधे मुक्ति पाओगे,
काँग्रेस का हुक्म; ज़रूरत क्या वारंट तलाशी की !

गढ़वाली जिसने अँग्रेज़ी शासन से विद्रोह किया,
महाक्रान्ति के दूत जिन्होंने नहीं जान का मोह किया,
अब भी जेलों में सड़ते हैं, न्यू-माडल आज़ादी है,
बैठ गए हैं काले, पर गोरे ज़ुल्मों की गादी है,
वही रीति है, वही नीति है, गोरे सत्यानाशी की !


1948

Tuesday, January 27, 2015

भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की

सरदार सोभा सिंह का बनाया
शहीद भगत सिंह का चित्र


भगतसिंह से

- शंकर शैलेन्द्र

भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की,
देशभक्ति के लिए आज भी सज़ा मिलेगी फाँसी की !

मत समझोपूजे जाओगे क्योंकि लड़े थे दुश्मन से,
रुत ऐसी है आँख लड़ी है अब दिल्ली की लंदन से,
कामनवैल्थ कुटुम्ब देश को खींच रहा है मंतर से--
प्रेम विभोर हुए नेतागणनीरा बरसी अंबर से,
भोगी हुए वियोगीदुनिया बदल गई बनवासी की !


सत्य अहिंसा का शासन हैराम-राज्य फिर आया है,
भेड़-भेड़िए एक घाट हैंसब ईश्वर की माया है !
दुश्मन ही जब अपनाटीपू जैसों का क्या करना है ?
शान्ति सुरक्षा की ख़ातिर हर हिम्मतवर से डरना है !
पहनेगी हथकड़ी भवानी रानी लक्ष्मी झाँसी की !

यदि जनता की बात करोगेतुम गद्दार कहाओगे--
बम्ब सम्ब की छोड़ोभाषण दिया कि पकड़े जाओगे !
निकला है कानून नयाचुटकी बजते बँध जाओगे,
न्याय अदालत की मत पूछोसीधे मुक्ति पाओगे,
काँग्रेस का हुक्मज़रूरत क्या वारंट तलाशी की !

गढ़वाली जिसने अँग्रेज़ी शासन से विद्रोह किया,
महाक्रान्ति के दूत जिन्होंने नहीं जान का मोह किया,
अब भी जेलों में सड़ते हैंन्यू-माडल आज़ादी है,
बैठ गए हैं कालेपर गोरे ज़ुल्मों की गादी है,
वही रीति हैवही नीति हैगोरे सत्यानाशी की !

(1948) 

Wednesday, October 2, 2013

काँग्रेस का हुक्म; ज़रूरत क्या वारंट तलाशी की - २ अक्टूबर स्पेशल


भगतसिंह से

-शंकर शैलेन्द्र

भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की,
देशभक्ति के लिए आज भी सज़ा मिलेगी फाँसी की !

मत समझो, पूजे जाओगे क्योंकि लड़े थे दुश्मन से,
रुत ऐसी है आँख लड़ी है अब दिल्ली की लंदन से,
कामनवैल्थ कुटुम्ब देश को खींच रहा है मंतर से--
प्रेम विभोर हुए नेतागण, नीरा बरसी अंबर से,
भोगी हुए वियोगी, दुनिया बदल गई बनवासी की !


सत्य अहिंसा का शासन है, राम-राज्य फिर आया है,
भेड़-भेड़िए एक घाट हैं, सब ईश्वर की माया है !
दुश्मन ही जब अपना, टीपू जैसों का क्या करना है ?
शान्ति सुरक्षा की ख़ातिर हर हिम्मतवर से डरना है !
पहनेगी हथकड़ी भवानी रानी लक्ष्मी झाँसी की !

यदि जनता की बात करोगे, तुम गद्दार कहाओगे--
बम्ब सम्ब की छोड़ो, भाषण दिया कि पकड़े जाओगे !
निकला है कानून नया, चुटकी बजते बँध जाओगे,
न्याय अदालत की मत पूछो, सीधे मुक्ति पाओगे,
काँग्रेस का हुक्म; ज़रूरत क्या वारंट तलाशी की !

गढ़वाली जिसने अँग्रेज़ी शासन से विद्रोह किया,
महाक्रान्ति के दूत जिन्होंने नहीं जान का मोह किया,
अब भी जेलों में सड़ते हैं, न्यू-माडल आज़ादी है,
बैठ गए हैं काले, पर गोरे ज़ुल्मों की गादी है,
वही रीति है, वही नीति है, गोरे सत्यानाशी की !

1948 

Friday, August 30, 2013

उसके मन में चाँद चमकता बादल करते रोर - शंकर शैलेन्द्र का स्मरण


आज गीतकार शंकर शैलेन्द्र की नब्बेवीं जयंती है. उन्हें स्मरण करते हुए वीरेन डंगवाल की एक कविता और शैलेन्द्र का लिखा एक अतिप्रिय गीत –

मिष्टू का मामला
शंकर शैलेन्द्र को याद करते

-वीरेन डंगवाल

मिष्टू प्यारी बच्ची थी
लगभग चन्दनबाड़ी थी.

          उसकी थी जगमग मुस्कान
          उसके सात रंग के होंठ
          अंडर-बंडर बातें उसकी नौ रंगों की
          छः नम्बर का उसका पैर
          मेरी कक्षा में पढ़ती थी अब तो खैर
          कहीं की कहीं को गयी भी.

पढ़ने-लिखने में मंदी थी पर अक्ल की काफ़ी तेज़.

          था मिष्टू में फूलों का वास
          उसके मन में चाँद चमकता बादल करते रोर
          तड़-तड़ कभी तड़कती बिजली
कभी नाचते मोर
कभी-कभी रिमझिम बारिश की
कभी हवा उत्तप्त कठोर
हां जी हां, मैं उससे प्यार करता था.

मीता मिष्टू उखड़ा-उखड़ा अपना तो बस वही हाल है
ऊपर से जीवन के रस्ते हुए कुछ अधिक दुर्गम-बीहड़
छूटे कितने संगी-साथी डवाँडोल हो रहे हौसले
और उम्र भी ज्यों मुस्काती बाँध रही तस्मे सैंडिल के
देह-धर्म भी धीरे-धीरे बदल रहे हैं.
फिर भी बांधे गाँठ-पोटली में जिन-जिन बातों की
जिनकी लेकर टेक बढ़ा जाता हूँ मैं अब भी आगे
उन्हीं बड़ी बढ़िया बातों में प्यारी मीता
तेरे भी कितने ही, कितने ही ख़याल हैं.

Sunday, January 27, 2013

दम भर जो उधर मुंह फेरे



१९५१ की फिल्म “आवारा”
मूल गीत गाया था लता मंगेशकर ने.
राज कपूर, नरगिस अभिनीत फिल्म के निर्देशक थे राज कपूर.
गीत लिखा था शंकर शैलेन्द्र ने. संगीत शंकर-जयकिशन का.

Friday, January 25, 2013

खोया खोया चाँद



१९६० की फिल्म “काला बाज़ार”
मूल गीत गाया था मोहम्मद रफ़ी ने.
देव आनन्द, कल्पना कार्तिक अभिनीत फिल्म के निर्देशक थे विजय आनंद.
गीत लिखा था शंकर शैलेन्द्र ने. संगीत सचिन देव बर्मन का.

Wednesday, January 23, 2013

प्यार से फिर क्यों डरता है दिल



१९५५ की फिल्म “श्री ४२०”
मूल गीत गाया था मन्ना डे और लता मंगेशकर ने.
राज कपूर, नरगिस अभिनीत फिल्म के निर्देशक थे राज कपूर.
गीत लिखा था शंकर शैलेन्द्र ने. संगीत शंकर-जयकिशन का.

Tuesday, January 22, 2013

ज़ुल्मी संग आँख लड़ी



१९५८ की फिल्म “मधुमती”
मूल गीत गाया था लता मंगेशकर ने.
दिलीप कुमार, वैजयंती माला अभिनीत फिल्म के निर्देशक थे बिमल रॉय.
गीत लिखा था शंकर शैलेन्द्र ने. संगीत सलिल चौधरी का.

Sunday, January 20, 2013

मैं तो कब से खड़ी इस पार



१९५८ की फिल्म “मधुमती”.
मूल गीत गाया था लता मंगेशकर ने.
दिलीप कुमार और वैजयन्ती माला अभिनीत फिल्म के निर्देशक थे बिमल रॉय.
गीत लिखा था शंकर शैलेन्द्र ने. संगीत  सलिल चौधरी का.