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Monday, May 9, 2011

मुझे अब भी झूठे बनाने होंगे इस विराट घोषणा के शब्द

राफ़ाल वोयात्चेक की एक और कविता -


कवि बोलता है खासी विडम्बना के साथ

मैं दिल से बात करता हूं, लेकिन तुम्हारे हाथ में
धर देता हूं एक अलग शब्द जैसे कोई उरोज
या नितम्ब, ताकि तुम पवित्रतापूर्वक
उसे ला सको अपनी वासना की लय में.

मैं लोगों से बात करता हूं, लेकिन मुख्य-पादरी
तक मैं लेकर जाता हूं एक खास स्त्री की
निषिद्ध आवाज़, जिसने उस जगह को तरतीब दी है
जहां वह मिलेगा उस से.

मैं अभी से कितना नज़दीक हूं दैवीय इलाकों के
क्योंकि मुझ से होकर बोलता है
वह विस्तार जिसका नाम ईश्वर है.

लेकिन सच तो यह है कि मृत्यु द्वारा
पसन्द किए जाने के लिए, मुझे अब भी झूठे बनाने होंगे
इस विराट घोषणा के शब्द.

बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे

"कहीं कोई होना चाहिये जिसे आप नहीं जानते
पर उसने मुझ पर कब्ज़ा कर रखा है;
मेरे जीवन, मेरी मृत्यु पर;
कागज़ का यह टुकड़ा."



इतनी शिद्दत से कविता को प्यार करने वाले, बहुत कम उम्र में चल बसे प्रतिभाशाली पोलिश कवि राफ़ाल वोयात्चेक की कुछेक कविताएं आप कुछ समय पहले से यहां पढ़ रहे हैं. आज उनकी एक और कविता पेश करता हूं -



बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे


बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे मानो चमक रहा होऊं
उन सितारों की तरह जो खिलते हैं रक्त की चरागाह पर
मेरी आंखें लगी हुईं तुम्हारे रक्त के सितारे पर
और बहुत हौले से बोलता हूं मैं - जब तक कि सफ़ेद नहीं हो जाती मेरी परछाईं

तुम्हारी देह के लिए मैं एक ठण्डा द्वीप हूं
जो गिरता है रात के भीतर, एक गर्म नन्हीं बूंद,
बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे मानो सपने में होऊं
तुम्हारा पसीना आग पकड़ चुका मेरी त्वचा पर

बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे किसी चिड़िया की मानिन्द
सुबह के वक़्त सूरज फिसल आता है तुम्हारी आंखों में
बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे
जैसे एक आंसू जो चेहरे पर झुर्रियां बना देता है

बहुत हौले से बोलता हूं तुमसे
जैसे तुम बोलती हो मुझसे.

(चित्र - विताली सादोव्स्की की पेन्टिंग राफ़ाल वोयात्चेक)

Wednesday, May 4, 2011

आपको डरना चाहिए ग़ुलाब से


राफ़ाल वोयात्चेक की असाधारण कविताओं से आपको मैंने इन दो पोस्ट्स के माध्यम से परिचित कराया था.

दुख ने मुझे भर दिया है साहस से और

मेरे सामने एक आदमी लाओ मैं उसकी महानता को पहचानूंगा

आज मुझे राफ़ाल की कुछ और कविताएं मिल गईं. उनमें से एक को तुरन्त अनूदित कर के यहां लगा रहा हूं. जिन सज्जनों को पिछली पोस्ट में जाने का समय न मिल सके उनके वास्ते राफ़ाल का परिचर दोबारा से -

राफ़ाल का जन्म १९४५ में पोलैंड के एक सम्मानित परिवार में हुआ था. ११ मई १९७१ को मात्र छब्बीस साल की आयु में आत्महत्या कर चुकने से पहले राफ़ाल ने तकरीबन दो सौ कविताएं लिखीं, जिन्हें चार संग्रहों की शक्ल में प्रकाशित किया गया. कुछ कविताएं उसने छ्द्म स्त्रीनाम से भी लिखीं.

उसकी पढ़ाई बहुत बाधित रही और ताज़िन्दगी वह अल्कोहोलिज़्म और डिप्रेशन का शिकार रहा. उसने कविता लिखना तब शुरू किया था जब पोलैंड के युवा कवियों को यह भान हो गया था कि उनका देश एक झूठे और भ्रष्ट राजनैतिक सिस्टम में फंस चुका है.

राफ़ाल की कविताएं तत्कालीन पोलैंड की राजनीति और सामाजिक परिस्थिति को एक सार्वभौमिक अस्तित्ववादी त्रासदी के स्तर पर देखती हैं. मोहभंग, व्यक्तिगत भ्रंश, और मृत्यु के प्रति ऑब्सेशन उसकी कविताओं की आत्मा में है.

पोलैंड के मिकोलो क़स्बे में, जहां वह जन्मा था - हाल ही में उसके नाम पर एक संग्रहालय का उद्घाटन किया गया है, बीसवीं सदी की महान पोलिश कविता में जीवन भर अभिशप्त रहे इस उल्लेखनीय युवा कवि को बहुत लाड़ के साथ याद किया जाता है


आपको डरना चाहिए ग़ुलाब से

राफ़ाल वोयात्चेक

आपको डरना चाहिए ग़ुलाब से; यह उस घाव का
मुंह होता है जो आपके भीतर रिसता रहता है लगातार

चूंकि मेरी जीभ, ओ निर्वसन, तुम्हें नहीं खोज सकती
मुझे बतलाओ कि तुम भयभीत हो, मैं यक़ीन कर लूंगा कि तुम्हारा अस्तित्व है.

कि तुम अस्तित्वमान हो, अपनी देह को लेकर सचेत.
देह एक झीना सा परदा होती है, एक कोमल सा झोंका

जिसे बदल सकता है खून सने खिड़की के शीशे में.
आग का एक तूफ़ान कब्ज़ा कर लेगा पड़ोसी ज़िले में,

हरेक नवजात की आंखों को जला डालेगा
जबकि गिरना शुरू कर देंगे अन्धी ग़मज़दा मांओं के बाल

तो मुझे बताओ, ताकि सिर्फ़ मेरे बाल तुम्हें सुन सकें
ताकि मेरी त्वचा पढ़ सके तुम्हारे होंठों को एक फुसफुसाहट की

तेज़ कांप के साथ, चाहे तुम अब भी रहते हो इस कीचभरे इन्सान के भीतर
मुझे बताओ, इसके पहले कि मैं इस से होकर बह जाऊं पूरा का पूरा.